कोरबा और बिलासपुर में बैठकों के जरिए जगाई जन-जागरूकता
| रिपोर्ट गणपत चौहान छत्तीसगढ़
छाल/छत्तीसगढ़: प्रदेश में मानवाधिकारों के संरक्षण और जन-जागरूकता की अलख जगाने के उद्देश्य से ‘मानवाधिकार सामाजिक मंच’ (Social Forum on Human Rights) द्वारा तीन दिवसीय विशेष बैठकों का सफल आयोजन किया गया। 10 से 12 फरवरी तक चली इन बैठकों में संगठन की मजबूती और अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने पर विशेष रणनीति बनाई गई।

कोरबा: जमीनी स्तर पर पीड़ितों की सहायता का संकल्प
कार्यक्रम का आगाज 10 फरवरी को कोरबा से हुआ। राष्ट्रीय महासचिव वहीद सिद्दीकी और छत्तीसगढ़ राज्य महासचिव तनवीर अहमद के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में मानवाधिकार हनन के मामलों पर त्वरित कार्रवाई और पीड़ितों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए ‘ग्राउंड-जीरो’ वर्किंग मॉडल पर चर्चा की गई।
अगले दिन, 11 फरवरी को पुनः आयोजित बैठक में राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव एच.के. पासवान और मध्य प्रदेश के राज्य अध्यक्ष एम.एस. व्यास शामिल हुए। इस दौरान कोरबा जिला अध्यक्ष फरियाद अली और स्थानीय युवाओं के जोश ने यह स्पष्ट कर दिया कि संगठन प्रदेश में युवाओं की भागीदारी के साथ एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।
बिलासपुर: भविष्य की योजनाओं का रोडमैप तैयार
आयोजन के अंतिम पड़ाव में 12 फरवरी को बिलासपुर में एक भव्य बैठक संपन्न हुई। जिला अध्यक्ष श्री रजत मल्होत्रा और वहीद सिद्दीकी के समन्वय में हुई इस बैठक में संगठन के विस्तार की रूपरेखा तैयार की गई। पदाधिकारियों ने साझा किया कि कैसे संस्था विधिक जानकारी के अभाव में जूझ रहे लोगों का संबल बनेगी।
अंतिम छोर तक न्याय पहुँचाना ही मुख्य लक्ष्य
संगठन के पदाधिकारी खेमसिंह चौहान ने बैठकों की सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए सभी राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने संगठन के मूल मंत्र को दोहराते हुए कहा:
“हमारा एकमात्र उद्देश्य समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विधिक जानकारी पहुँचाना और उनके संवैधानिक हितों की रक्षा करना है। छत्तीसगढ़ की यह सक्रियता मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।”
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
- उद्देश्य: मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता और विधिक साक्षरता।
- मुख्य उपस्थिति: वहीद सिद्दीकी (राष्ट्रीय महासचिव), तनवीर अहमद, एच.के. पासवान, एम.एस. व्यास।
- रणनीति: जिला स्तर पर युवाओं को जोड़ना और पीड़ितों के लिए त्वरित सहायता तंत्र विकसित करना।
