छत्तीसगढ़ में जल्द शुरू होगी ‘गौधाम योजना’, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया संबल
रिपोर्ट: टेलीग्राफ टाइम्स रायगढ़
By : गणपत चौहान
टेलीग्राफ टाइम्स
अगस्त 11,2025
रायगढ़। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुधन संरक्षण को नई दिशा देने के लिए जल्द ही ‘गौधाम योजना’ की शुरुआत करने जा रही है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल निराश्रित और घुमंतु गौवंशीय पशुओं की देखभाल सुनिश्चित करेगी, बल्कि जैविक खेती, चारा विकास और गौ-आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा देगी, जिससे गांव-गांव में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
पशुधन विकास विभाग द्वारा तैयार इस योजना के ड्राफ्ट को वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। योजना विशेष रूप से उन पशुओं की सुरक्षा पर केंद्रित है, जो तस्करी या अवैध परिवहन में पकड़े जाते हैं, साथ ही आवारा और घुमंतु पशुओं के संरक्षण के लिए भी इसका संचालन किया जाएगा। प्रत्येक गौधाम में अधिकतम 200 गौवंशीय पशु रखने की व्यवस्था होगी।
चरवाहों और गौसेवकों को मिलेगा नियमित मानदेय
योजना के तहत चरवाहों को प्रतिमाह ₹10,916 और गौसेवकों को ₹13,126 का मानदेय दिया जाएगा। इसके अलावा मवेशियों के चारे के लिए भी प्रतिदिन अलग से राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
उत्कृष्ट गौधाम को वहां रहने वाले प्रत्येक पशु के लिए पहले वर्ष ₹10 प्रतिदिन, दूसरे वर्ष ₹20 प्रतिदिन, तीसरे वर्ष ₹30 प्रतिदिन और चौथे वर्ष ₹35 प्रतिदिन दिए जाएंगे।
जैविक खेती और चारा विकास को मिलेगा प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि गौधाम योजना से न केवल पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि चरवाहों और गौसेवकों को स्थायी आय का साधन मिलेगा। उन्होंने बताया कि योजना के माध्यम से पशुओं की नस्ल सुधार पर भी काम होगा, जिससे वे अधिक दूध देने और खेती-किसानी में बेहतर उपयोग के योग्य बनेंगे।
इसके साथ ही, राज्य में जैविक खेती और चारा विकास कार्यक्रम को भी गति मिलेगी, जो ग्राम स्तर पर रोजगार बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में मददगार साबित होगा।
राज्य सरकार का दावा है कि यह योजना पशुधन संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।