छत्तीसगढ़ बना भारत के विकास का ग्रोथ इंजन: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत

छत्तीसगढ़ बना भारत के विकास का ग्रोथ इंजन: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत

रायपुर/कवर्धा, 2 जनवरी 2026

| रिपोर्ट गणपत चौहान छत्तीसगढ़

​छत्तीसगढ़ की पर्यटन क्षमता और विकास को एक नई ऊंचाई देते हुए केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भव्य भूमिपूजन किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ की सराहना करते हुए इसे देश के विकास का ‘ग्रोथ इंजन’ और पर्यटन मानचित्र पर सबसे तेजी से उभरता हुआ राज्य बताया।

​भोरमदेव कॉरिडोर: पर्यटन का नया अध्याय

​स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति दी गई है।

  • लागत और निर्माण: कॉरिडोर का निर्माण 146 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से किया जाएगा।
  • उद्देश्य: इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र भोरमदेव को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
  • सुविधाएं: कॉरिडोर के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, सौंदर्यीकरण और सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

​मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणा

​कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बोड़ला से भोरमदेव तक सड़क उन्नयन कार्य को मंजूरी दी, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आवागमन सुगम हो सकेगा।

​संबोधन के प्रमुख अंश

​”छत्तीसगढ़ न केवल अपनी खनिज संपदा बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर के कारण भी देश का ग्रोथ इंजन है। भोरमदेव कॉरिडोर बनने से यह क्षेत्र देश के प्रमुख पर्यटन सर्किट का हिस्सा बनेगा।”

गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय पर्यटन मंत्री

 

​”हमारी सरकार राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने और उसे विकास से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। भोरमदेव कॉरिडोर स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।”

विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री

 

​आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

  • स्थानीय रोजगार: पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने से कवर्धा और आसपास के क्षेत्रों में होटल, गाइड और हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
  • सांस्कृतिक संरक्षण: ‘छत्तीसगढ़ के खजुराहो’ के नाम से प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता को वैश्विक पहचान मिलेगी।

​यह परियोजना राज्य सरकार और केंद्र सरकार के साझा प्रयासों का परिणाम है, जो छत्तीसगढ़ को इको-टूरिज्म और रिलिजियस टूरिज्म के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी।

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