गणपत चौहान
रायगढ़ | छत्तीसगढ़ की माटी और विशेषकर बस्तर के आदिवासी समाज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण आया है। राज्यसभा सांसद और छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती फूलोदेवी नेताम को राज्यसभा में उपसभापति (पैनल ऑफ वाइस चेयरपर्सन) के लिए मनोनीत किया गया है। इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ की महिलाओं और आदिवासी अस्मिता का सम्मान बताते हुए प्रदेश भर में हर्ष की लहर है।
एक संघर्षशील और निर्भीक नेतृत्व की पहचान
साउथ ईस्टर्न कोयला मजदूर कांग्रेस (इंटक) रायगढ़ क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय सचिव डी.एल. ग्वालवंशी ने इस नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लिए मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि फूलोदेवी नेताम केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि साहस का प्रतीक हैं।
”श्रीमती नेताम ने नक्सलियों की गोलियों का सामना किया और झीरम घाटी जैसी वीभत्स घटना में कांग्रेस की एक पूरी पीढ़ी खोने के बाद भी विचलित नहीं हुईं। उनकी निडरता और पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा ही है कि आज वे सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की विश्वस्त नेत्रियों में शुमार हैं।”
— डी.एल. ग्वालवंशी
ऐतिहासिक उपलब्धि: पहली बार छत्तीसगढ़ को मिला यह सम्मान
ग्वालवंशी जी ने रेखांकित किया कि यह राज्य के संसदीय इतिहास में संभवतः पहला अवसर है जब छत्तीसगढ़ से किसी सांसद को राज्यसभा में ‘आसंदी’ संभालने का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। यह न केवल उनकी व्यक्तिगत क्षमता का प्रमाण है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में छत्तीसगढ़ के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है।
प्रमुख बिंदु और उपलब्धियां:
- बस्तर की आवाज: दो बार राज्यसभा सांसद के रूप में निर्वाचित होकर बस्तर और छत्तीसगढ़ के मुद्दों को प्रखरता से उठाना।
- संगठनात्मक शक्ति: प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राज्य में महिलाओं की एक मजबूत और सक्रिय ‘फौज’ खड़ी करना।
- झीरम घाटी की गवाह: कठिन समय में भी पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता और साहस का परिचय देना।
नेतृत्व के प्रति आभार
इस गौरवशाली नियुक्ति के लिए डी.एल. ग्वालवंशी ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश नेतृत्व के सही मार्गदर्शन और अनुशंसा के कारण ही आज छत्तीसगढ़ की एक जुझारू महिला नेत्री को देश के उच्च सदन का संचालन करने का अवसर प्राप्त हुआ है।