चीन से समुद्री रास्ते भारत पहुंचा 1 लाख किलो ‘बारूद’, बड़ा आतंकी साजिश नाकाम – डीआरआई का ‘ऑपरेशन फायर ट्रेल’ सफल
मुंबई | टेलीग्राफ टाइम्स । गौरव कोचर
रिपोर्ट: प्राची चतुर्वेदी । जुलाई 12,2025
भारत के तीन बड़े पोर्ट्स – न्हावा शेवा, मुंद्रा और कांडला SEZ – पर एक साथ हुए खुफिया अभियान में राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक बड़ी आतंकी साजिश को विफल कर दिया है। डीआरआई की मुंबई ज़ोनल यूनिट ने इन पोर्ट्स से 100 मीट्रिक टन (1 लाख किलो) अवैध बारूद बरामद किया है, जिसे पटाखों के नाम पर चीन से मंगाया गया था।
इस खतरनाक खेप को छिपाने के लिए ‘मिनी डेकोरेटिव प्लांट्स’, ‘आर्टिफिशियल फ्लावर्स’ और ‘प्लास्टिक मैट्स’ जैसे सामान के नाम से फर्जी कागज़ात बनाए गए थे। एजेंसी ने इस खुलासे को ‘ऑपरेशन फायर ट्रेल’ का हिस्सा बताया है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के मुताबिक, डीआरआई को सूचना मिली थी कि चीन से बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पटाखों की तस्करी की जा रही है। जांच में पता चला कि सात कंटेनरों में घातक विस्फोटक पदार्थ भरे हुए हैं। जांच के बाद ये कंटेनर जब्त कर लिए गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन कंटेनरों में ज़रा सी भी चिंगारी लगती, तो ये एक साथ तीनों पोर्ट्स को तबाह कर सकते थे। इन बारूद की अंदाज़ित कीमत 35 करोड़ रुपये है, लेकिन जान-माल की क्षति इससे कहीं अधिक हो सकती थी।
कहाँ-कहाँ भेजे जाने थे ये कंटेनर?
प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि ये कंटेनर देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजने की तैयारी में थे। कुछ कंटेनर SEZ क्षेत्रों में पहले से ही मौजूद थे, और इन्हें आयात-निर्यात कोड (IEC) धारकों के ज़रिए क्लीयर किया जाना था।
डीआरआई के अधिकारियों ने बताया कि इनका ट्रांजिट रिकॉर्ड, कस्टम क्लीयरेंस और बाजार में संभावित वितरण के लिए स्थानीय नेटवर्क की ट्रैकिंग की जा रही है।
क्या थी बड़ी साजिश?
इस पूरे मामले ने देश की सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि:
- यह सिर्फ तस्करी या कर चोरी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी साजिश भी हो सकती है।
- इस रैकेट के पीछे अंतरराष्ट्रीय फाइनेंस माफिया या राष्ट्र-विरोधी ताकतें हो सकती हैं।
- नकली दस्तावेज़ों के ज़रिए भारत में बारूद भेजना किसी बड़े आतंकी साजिश की तैयारी का हिस्सा हो सकता है।
केंद्रीय मंत्रालय ने क्या कहा?
वित्त मंत्रालय ने डीआरआई की कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में बड़ी सफलता” बताया है। मंत्रालय का कहना है कि इससे यह साबित होता है कि एजेंसियां तस्करी और अवैध व्यापार के खिलाफ पूरी तरह से सजग और प्रतिबद्ध हैं।
अब आगे क्या?
- DRI की जांच जारी है।
- कंटेनरों की शिपमेंट, कस्टम क्लीयरेंस और मार्केट डिस्ट्रीब्यूशन चैनल की जांच की जा रही है।
- इस बात की भी जांच हो रही है कि कौन से भारतीय एजेंट, व्यापारी या कंपनियां इसमें शामिल थीं।
यह घटना केवल एक तस्करी का मामला नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ रची गई संगठित साजिश की ओर इशारा करती है। यदि यह बारूद देश के भीतरी इलाकों तक पहुंच जाता, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते थे।
यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी है कि अब युद्ध केवल सीमा पर नहीं, बल्कि व्यापार, कंटेनर और डॉक्यूमेंट्स की शक्ल में भी लड़ा जा रहा है।

