चित्रकूट स्टेडियम में विशाल योग एवं ध्यान कार्यक्रम: योग भारत की अमूल्य धरोहर, इसे जन-जन तक पहुँचाना हमारा दायित्व – देवनानी

लोकेंद्र सिंह शेखावत 

जयपुर, 20 जून। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, वैशाली नगर, जयपुर द्वारा चित्रकूट स्टेडियम में ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा विश्व नवसृजन’ विषय पर एक विशाल योग एवं ध्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के प्रबुद्ध नागरिकों और गणमान्य अतिथियों ने भाग लेकर योग, ध्यान एवं आध्यात्मिकता को अपने जीवन में अपनाने का दृढ़ संकल्प लिया।

​योग संपूर्ण विश्व को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखा रहा: वासुदेव देवनानी

​प्रातः 6 बजे चित्रकूट स्टेडियम में आयोजित हुए इस भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि भारत की प्राचीन योग परंपरा आज संपूर्ण विश्व को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखा रही है। योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है और प्रत्येक नागरिक को इसे अपने दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए। योग व्यक्ति को सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी अनुशासन, संयम और सकारात्मक सोच प्रदान करता है।

​विधानसभा अध्यक्ष ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया, जिसके बाद योग एक विश्वव्यापी जनआंदोलन बन चुका है। इसके साथ ही उन्होंने योगगुरु स्वामी रामदेव के योगदान का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने योग को घर-घर तक पहुंचाकर करोड़ों लोगों को एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

​योगाभ्यास और अष्टांग योग के सिद्धांतों पर चर्चा

​कार्यक्रम की शुरुआत में दिल्ली से आए योगाचार्य दिनेश ने उपस्थित विशाल जनसमूह को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं सूक्ष्म व्यायामों का गहन अभ्यास कराया।

​सेवा केन्द्र प्रभारी राजयोगिनी बीके चंद्रकला ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की। इस दौरान मंच से योग प्रशिक्षकों द्वारा अष्टांग योग के आठ महत्वपूर्ण सिद्धांतों के महत्व पर प्रकाश डाला गया:

  • यम और नियम: नैतिक आचरण और व्यक्तिगत अनुशासन।
  • आसन और प्राणायाम: शारीरिक मुद्राएं और श्वास पर नियंत्रण।
  • प्रत्याहार और धारणा: इंद्रियों को अंतर्मुखी करना और एकाग्रता बढ़ाना।
  • ध्यान और समाधि: मन की स्थिरता और परमात्मा से जुड़ाव।

​वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अष्टांग योग केवल शारीरिक कसरत नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास का एक संपूर्ण विज्ञान है।

​कार्यक्रम में पहुंचे कई गणमान्य अतिथि

​इस गरिमामयी कार्यक्रम में राजनीति, समाज और आध्यात्मिकता से जुड़ी कई बड़ी हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे:

  • ​राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनियां
  • ​कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़
  • ​सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा
  • ​पूर्व महापौर सौम्या गुर्जर
  • ​महेंद्र यादव
  • ​ब्रह्माकुमारीज राजस्थान की क्षेत्रीय संचालिका राजयोगिनी बीके सुषमा दीदी

​इनके साथ ही शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों और संस्था के भाई-बहनों ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर ध्यान और योग का लाभ उठाया।

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