चारधाम यात्रा 2026: हेलीकॉप्टर संचालन का पहला चरण बिना किसी दुर्घटना के सफलतापूर्वक संपन्न

दुर्गम पहाड़ियों और बदलते मौसम के बीच कड़े सुरक्षा नियमों के पालन से पूरी हुई उड़ानें

  • पहले चरण में 14,000 से अधिक उड़ानों के जरिए लगभग 78,000 तीर्थयात्रियों ने किया सफर
  • पायलटों के लिए न्यूनतम 750 घंटे का पर्वतीय अनुभव और विमानों में 70% क्षमता का नियम रहा कारगर

देहरादून, 27 जून/ प्रीति बालानी 

नागर विमानन मंत्रालय ने चारधाम यात्रा 2026 के पहले चरण के दौरान हेलीकॉप्टर संचालन के सुरक्षित, निर्बाध और सफल समापन पर गहरा संतोष व्यक्त किया है। अप्रैल 2026 में यात्रा की शुरुआत के साथ शुरू हुआ यह पहला चरण 26 जून 2026 को समाप्त हुआ। देश के सबसे चुनौतीपूर्ण विमानन क्षेत्रों में से एक माने जाने वाले इस हिमालयी क्षेत्र में पूरे दो महीने तक बिना किसी अप्रिय घटना के उड़ानों का संचालन सरकार की मजबूत परिचालन योजना और कड़े नियामकीय पर्यवेक्षण की सफलता को दर्शाता है।

​पहले चरण के संचालन के प्रमुख आंकड़े

​इस यात्रा सीजन के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए प्रतिदिन लगभग 400 हेलीकॉप्टर उड़ानों का संचालन किया गया।

  • शटल उड़ानें: कुल 12,032 शटल उड़ानों के माध्यम से 67,064 तीर्थयात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया।
  • चार्टर उड़ानें: अतिरिक्त 2,065 चार्टर उड़ानों ने 11,715 तीर्थयात्रियों को कुशल कनेक्टिविटी प्रदान की।
  • कुल लाभार्थी: पहले चरण में कुल मिलाकर 78,779 श्रद्धालुओं ने सुरक्षित हवाई सेवा का लाभ उठाया।

​प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मुख्यमंत्री के सहयोग से बनी रणनीति

​इस वर्ष के सफल संचालन पर विचार साझा करते हुए नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा:

​”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारी सरकार ने यह सुनिश्चित करने को विशेष प्राथमिकता दी है कि चारधाम यात्रा पर जाने वाला प्रत्येक श्रद्धालु अधिक सुविधा, सहजता और सुरक्षा के साथ यात्रा कर सके। इस वर्ष की यात्रा शुरू होने से काफी पहले डीजीसीए, हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों और यूकाडा (UCADA) सहित सभी हितधारकों के साथ समन्वय कर विभिन्न स्तरों पर लगातार समीक्षा की गई थी। व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सक्रिय सहयोग के लिए मैं उनका विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।”

 

​नागर विमानन मंत्री ने स्वयं कई उच्च स्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की, जिसमें नागर विमानन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा और उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने संयुक्त रूप से सुरक्षा ढांचे को अंतिम रूप दिया। हर हफ्ते समीक्षा बैठकों के माध्यम से परिचालन से जुड़े मुद्दों का समय पर समाधान किया गया।

​बहु-स्तरीय सुरक्षा रणनीति और तकनीकी सुदृढ़ीकरण

​विगत वर्षों की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से सीख लेते हुए मंत्रालय ने इस बार सुरक्षा के मोर्चे पर अभूतपूर्व कदम उठाए:

  • हवाई यातायात प्रबंधन (ATC): भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने घाटी में सुव्यवस्थित आवाजाही के लिए समर्पित के-रूट्स (K-Routes) प्रकाशित किए। सहस्रधारा और सेरसी में हवाई यातायात नियंत्रण सेवाएं शुरू की गईं। बद्रीनाथ और केदारनाथ में भी स्थायी एटीसी के लिए भूमि की पहचान कर ली गई है।
  • हाई-टेक मॉनिटरिंग: उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने महत्वपूर्ण स्थानों पर 33 पीटीजेड (पैन-टिल्ट-ज़ूम) कैमरे लगाए। सहस्रधारा और सीतापुर में दो एकीकृत कमांड केंद्र (ICCCC) बनाकर हर हेलीकॉप्टर की ट्रैकिंग डिवाइस से लाइव मॉनिटरिंग की गई।
  • मौसम का सटीक पूर्वानुमान: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के सहयोग से सीतापुर, केदारनाथ, बद्रीनाथ, झाला और खरसाली में पांच स्वचालित मौसम अवलोकन प्रणाली (AWOS) और सीलोमीटर स्थापित किए गए, जिससे पायलटों को पल-पल के मौसम की जानकारी मिली।

​पायलटों के लिए कड़े नियम और जीरो-टॉलरेंस नीति

​नागर विमानन महानिदेशालय (DGFT/DGCA) ने परिचालन को सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण और कड़े नीतिगत बदलाव लागू किए:

सुरक्षा मानक

नए नियम एवं सुरक्षा उपाय

पायलटों की योग्यता

न्यूनतम 750 घंटे का पर्वतीय उड़ान अनुभव अनिवार्य, जिसमें पिछले एक वर्ष में कम से कम 100 घंटे की उड़ान तथा केदारनाथ में न्यूनतम 10 टेकऑफ और लैंडिंग शामिल हो।

यात्री क्षमता सीमा

ऊंचाई पर जोखिम कम करने के लिए हेलीकॉप्टरों में यात्रियों की संख्या अधिकतम अनुमत क्षमता के 70 प्रतिशत तक ही सीमित रखी गई।

थकान प्रबंधन

पायलटों के फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) की रोजाना जांच की गई ताकि थकान के कारण होने वाले जोखिमों को खत्म किया जा सके।

विद्युत लाइनों से सुरक्षा

पहाड़ियों पर स्थित हाई-टेंशन बिजली की लाइनों पर विमानन सुरक्षा संकेतक और चेतावनी गुब्बारे लगाए गए ताकि पायलटों को दूर से दृश्यता मिल सके।

नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि विमानन सुरक्षा में सरकार का दृष्टिकोण ‘जीरो-टॉलरेंस’ (शून्य-सहनशीलता) का है। जब बात पवित्र चारधाम यात्रा पर आने वाले लाखों भक्तों की सुरक्षा से जुड़ी हो, तो इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। मंत्रालय अब इसी प्रतिबद्धता के साथ अगले चरणों की तैयारियों में जुट गया है।

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