गौरव कोचर
नई दिल्ली | 22 अप्रैल 2026
आज उत्तराखंड की पावन देवभूमि में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के इस पावन अवसर के साथ ही वर्ष 2026 की चारधाम यात्रा का औपचारिक शुभारंभ भी हो गया है। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री ने देश-दुनिया से आने वाले सभी तीर्थयात्रियों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और उनके मंगलमय प्रवास की कामना की।
श्रद्धालुओं के नाम विशेष पत्र
परंपरा से हटकर प्रधानमंत्री ने इस वर्ष यात्रा पर आने वाले भक्तों के लिए एक विशेष पत्र के माध्यम से अपने भाव व्यक्त किए हैं। अपने पत्र में उन्होंने तीर्थयात्रियों का स्वागत करते हुए उनके “कुशल मंगल” के लिए प्रार्थना की। प्रधानमंत्री ने इस यात्रा को केवल एक धार्मिक दौरा न मानकर, इसे भारत की आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बताया।
सांस्कृतिक एकता का दिव्य उत्सव
प्रधानमंत्री ने केदारनाथ धाम और चारधाम यात्रा के आध्यात्मिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए निम्नलिखित मुख्य बातें साझा कीं:
- अटूट आस्था: यह यात्रा भारत की अटूट आस्था और अटूट एकता का प्रतीक है।
- शाश्वत विरासत: इन तीर्थस्थलों के दर्शन से देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना का अनुभव होता है।
- सनातन संस्कृति: चारधाम की यात्रा हमें भारत की सनातन संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से जोड़ती है।
सोशल मीडिया संदेश (X पर पोस्ट)
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से भी अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने लिखा:
”देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती पर आज केदारनाथ धाम के कपाट पूरे विधि-विधान के साथ हम सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। यह यात्रा हमारी आस्था और एकता का दिव्य उत्सव है। मेरी कामना है कि बाबा केदार सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और आपकी यात्रा शुभ हो।”
यात्रा की शुरुआत और प्रबंध
आज सुबह केदारनाथ धाम के द्वार खुलते ही हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने ‘जय बाबा केदार’ के उद्घोष के साथ दर्शन किए। प्रशासन द्वारा इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में आने वाले यात्रियों के लिए सुरक्षा और स्वास्थ्य के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
प्रधानमंत्री के इस संदेश और पत्र ने तीर्थयात्रियों के उत्साह को और बढ़ा दिया है, जिससे यह यात्रा इस वर्ष एक नई आध्यात्मिक ऊंचाई छूने के लिए तैयार है।