चांदपोल में मंदिर के पास शराब की दुकान का भारी विरोध: 31 दिसंबर को बाजार बंद का आह्वान, निकलेगी विशाल रैली
| योगेश शर्मा
जयपुर। गुलाबी नगरी के ऐतिहासिक चांदपोल बाजार में स्थित प्राचीन चौबीस मंदिर के पास शराब की दुकान खोलने के विरोध में स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली से नाराज व्यापारियों ने निर्णय लिया है कि इस मांग के समर्थन में 31 दिसंबर को चांदपोल बाजार पूर्णतः बंद रखा जाएगा।
लाखों की आस्था और सुरक्षा का प्रश्न
चौबीस मंदिर परिसर में प्रतिदिन हजारों और विशेष अवसरों पर लाखों की संख्या में महिलाएं और स्थानीय श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। शराब की दुकान संख्या 145, मंदिर से मात्र 20 मीटर की दूरी पर स्थित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थल के इतने पास ठेका होने से क्षेत्र का वातावरण दूषित हो रहा है और महिलाओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना का आरोप
व्यापारियों का तर्क है कि पूर्व में भी इस दुकान को इसी स्थान पर खोला गया था, जिसे तत्कालीन कलेक्टर ने नियमों के विरुद्ध मानकर सीज कर दिया था। संघर्ष समिति ने यह भी बताया कि पुलिस कमिश्नर की ओर से भी एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यह स्थान शराब का ठेका खोलने के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बावजूद आबकारी विभाग द्वारा बार-बार दुकान खोलने के प्रयासों से जनता में गहरा आक्रोश है।
आंदोलन की रूपरेखा: काली पट्टी और विशाल रैली
25 दिसंबर को आयोजित एक विशाल आम सभा में विरोध प्रदर्शन के चरण तय किए गए:
- काली पट्टी: विरोध स्वरूप व्यापारी अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर व्यापार करेंगे।
- विशाल रैली: 30 दिसंबर को सुबह 11 बजे छोटी चौपड़ से चांदपोल तक एक विरोध रैली निकाली जाएगी।
- बाजार बंद: मांग पूरी न होने की स्थिति में 31 दिसंबर को चांदपोल बाजार के शटर नहीं खुलेंगे।
31 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन
आंदोलन को सुनियोजित ढंग से चलाने के लिए चांदपोल बाजार व्यापार मंडल के साथ मिलकर 31 व्यापारियों और स्थानीय लोगों की एक संघर्ष समिति गठित की गई है। यह समिति आंदोलन की आगामी रणनीति तय करेगी और प्रशासन के साथ वार्ता का जिम्मा संभालेगी।
व्यापार मंडल का पूर्ण समर्थन
चांदपोल बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुभाष गोयल, महामंत्री घनश्याम भुतड़ा, उपाध्यक्ष अचल जैन व कृष्ण अग्रवाल और संयुक्त मंत्री चेतन अग्रवाल ने इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। व्यापारियों ने दो टूक कहा है कि जब तक इस शराब की दुकान का स्थायी समाधान नहीं होता और इसे यहाँ से हटाया नहीं जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
संघर्ष समिति ने आबकारी विभाग से पुरजोर निवेदन किया है कि जनभावनाओं और धार्मिक मर्यादा का सम्मान करते हुए इस दुकान को तुरंत किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।

