घुमन्तु समुदाय को मिलेगी नई पहचान: 12 से 31 जनवरी तक प्रदेशभर में लगेंगे विशेष सहायता शिविर

घुमन्तु समुदाय को मिलेगी नई पहचान: 12 से 31 जनवरी तक प्रदेशभर में लगेंगे विशेष सहायता शिविर

जयपुर | 10 जनवरी, 2026

| नरेश गुनानी

​मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सुशासन संकल्प के तहत राजस्थान के विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु (DTNT) समुदाय के व्यक्तियों को पहचान दिलाने और उन्हें जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने विशेष पहल की है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत के निर्देशानुसार, आगामी 12 से 31 जनवरी तक प्रदेश के सभी जिलों में ऑनलाइन घुमन्तु पहचान प्रमाण पत्र जारी करने हेतु विशेष सहायता शिविर आयोजित किए जाएंगे।

​शिविरों का आयोजन और क्लस्टर व्यवस्था

​अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देश जारी कर इन शिविरों के सफल क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी है। आयोजन की रूपरेखा इस प्रकार रहेगी:

  • शहरी एवं ग्रामीण कवरेज: समस्त पंचायत समिति, नगरपालिका, नगर परिषद और नगर निगम स्तर पर शिविर आयोजित होंगे।
  • वार्ड क्लस्टर: शहरी क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थिति के अनुसार 5 से 8 वार्डों का एक क्लस्टर बनाकर कैंप लगाए जाएंगे।
  • निःशुल्क आवेदन: ई-मित्रों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क रहेगी।

​एक ही छत के नीचे बनेंगे महत्वपूर्ण दस्तावेज

​मंत्री अविनाश गहलोत ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन शिविरों का उद्देश्य केवल प्रमाण पत्र जारी करना ही नहीं, बल्कि समुदाय के व्यक्तियों का पूर्ण दस्तावेजीकरण करना है। शिविरों में निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी:

  1. घुमन्तु पहचान प्रमाण पत्र (ऑनलाइन)।
  2. मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड बनाने की सुविधा।
  3. जाति प्रमाण पत्र एवं मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन।

​प्रभावी निगरानी और समन्वय

​शिविरों के सुचारू संचालन के लिए प्रत्येक कैंप में एक प्रभारी अधिकारी और दो-तीन ई-मित्र धारकों की नियुक्ति की जाएगी। मंत्री ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से इन शिविरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं ताकि अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों तक सूचना पहुँच सके और वे राज्य व केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठा सकें।

​अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स को पाबंद किया है कि वे स्वयं इन शिविरों की प्रगति की निगरानी करें ताकि प्रदेश का कोई भी घुमन्तु परिवार पहचान पत्र से वंचित न रहे।

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