प्रीति बलानी
नई दिल्ली/जयपुर: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने आज भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। मात्र 15 मिनट के भीतर निफ्टी ने ऊंचे स्तरों से गोता लगाया, जिससे ट्रेडर्स के बीच अनिश्चितता बढ़ गई है।
ट्रंप की डेडलाइन और ईरान का पलटवार
बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह सप्ताहांत पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पूरी तरह खोलने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ किया है कि यदि ईरान इस जलमार्ग को नहीं खोलता है, तो अमेरिका मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) के बाद ईरान के पावर प्लांट्स और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला कर सकता है।
दूसरी ओर, ईरान ने इस धमकी को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि जब तक युद्ध के नुकसान की भरपाई नहीं होती, वह पीछे नहीं हटेगा। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग पर मंडराते इस खतरे ने निवेशकों के होश उड़ा दिए हैं।
कच्चे तेल में उबाल: $110 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
खाड़ी देशों में युद्ध की आहट का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 1.15% की बढ़त के साथ 110.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है, ऐसे में $110 के ऊपर का भाव घरेलू महंगाई और राजकोषीय घाटे के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।
बाजार का उतार-चढ़ाव: 1 घंटे की पूरी तस्वीर
आज सुबह बाजार में ‘वोलेटिलिटी’ (उतार-चढ़ाव) अपने चरम पर रही:
- सुबह 9:15 तक: निफ्टी ने 22,798 का हाई बनाया, जहाँ IT शेयरों ने सहारा देने की कोशिश की।
- सुबह 9:25 तक: अचानक आई बिकवाली ने निफ्टी को 22,600 के स्तर पर ला पटका।
- सुबह 9:40 तक: बाजार ने एक बार फिर रिकवरी की कोशिश की और निफ्टी 22,700 के पार निकला।
- सुबह 10:00 बजे: ऊपरी स्तरों पर टिकने में नाकाम रहने के बाद बाजार फिर फिसला और 22,570 के आसपास ट्रेड करने लगा।
बाजार की गिरावट के 4 मुख्य कारण
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कारण |
प्रभाव |
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जियोपॉलिटिकल रिस्क |
अमेरिका-ईरान तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश (Gold/USD) की ओर भाग रहे हैं। |
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महंगा क्रूड ऑयल |
तेल की बढ़ती कीमतें भारत में लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ा रही हैं। |
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ब्याज दर का डर |
महंगाई बढ़ने के डर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हुई है, जिससे NBFC और ऑटो सेक्टर पर दबाव है। |
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कमजोर अर्निंग्स |
कंपनियों की तिमाही आय (Earnings) में सुस्ती के अंदेशे ने निवेशकों के सेंटिमेंट को कमजोर किया है। |
बाजार विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बाजार में इसी तरह की ‘धुआंधार’ उठापटक जारी रहेगी। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे फिलहाल भारी पोजीशन बनाने से बचें और मंगलवार रात को आने वाली अमेरिकी डेडलाइन पर नजर रखें।
