नई दिल्ली/ आसिम अमिताव बिस्वाल/ भारत ने पर्यावरण और आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) संरक्षण की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरत ग्लाव झील को देश का 101वां रामसर स्थल घोषित किया गया है। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश को भी अपनी पहली रामसर साइट मिल गई है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा करते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे भारत के जैव विविधता संरक्षण, जल एवं जलवायु सुरक्षा तथा सतत आजीविका के संकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
2014 से अब तक का सफर: 26 से 101 रामसर स्थल
केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि को साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के रामसर नेटवर्क में हुए अभूतपूर्व विस्तार का उल्लेख किया।

- 2014 में: भारत में केवल 26 रामसर स्थल थे।
- 2026 में: यह संख्या बढ़कर 101 हो गई है।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह उल्लेखनीय यात्रा पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 100 का आंकड़ा पार करने के बाद भी यह यात्रा लगातार जारी है, जो इन नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों (Ecosystems) पर निर्भर स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा करने में मदद करेगी।
पारिस्थितिक महत्व: क्यों खास है ग्लाव झील?
ग्लाव झील न केवल प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र है, बल्कि जैव विविधता के लिहाज से भी अत्यंत समृद्ध है।
- भौगोलिक स्थिति: यह झील कमलांग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभ्यारण्य के अंतर्गत पूर्वी हिमालय क्षेत्र में स्थित एक निर्मल मीठे पानी की झील है।
- जल स्रोत: यह बारहमासी पहाड़ी धाराओं से पोषित होती है और चारों ओर घने जंगलों से घिरी हुई है।
- वनस्पति विविधता: इस आर्द्रभूमि क्षेत्र में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियां और 49 दुर्लभ ऑर्किड प्रजातियां पाई जाती हैं।
रामसर स्थल का महत्व
रामसर स्थल घोषित होने से ग्लाव झील और इसके आसपास के अनूठे पारिस्थितिक तंत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण और पहचान मिलेगी। इससे न केवल स्थानीय जैव विविधता सुरक्षित रहेगी, बल्कि क्षेत्र में इको-टूरिज्म (पर्यावरण पर्यटन) और सतत आजीविका के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।