नरेश गुनानी
जयपुर, 14 जून। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की समस्याओं, विशेषकर जमीन से जुड़े मामलों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जनकल्याण शिविर के अन्तर्गत प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर 12 जून से 15 जुलाई 2026 तक ‘ग्रामीण सेवा शिविर-2026’ का वृहद स्तर पर आयोजन किया जा रहा है।
इस महा-अभियान के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग ने प्रशासनिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण (डेलीगेशन) किया है। अभियान की अवधि के लिए समस्त संभागीय आयुक्तों, जिला कलक्टरों, शिविर प्रभारियों और राजस्व अधिकारियों को विशेष रूप से प्राधिकृत करते हुए उनकी शक्तियां बढ़ा दी गई हैं, ताकि ग्रामीणों के काम ऑन-स्पॉट पूरे किए जा सकें। यह आदेश 15 जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेंगे।
खाली पदों पर तुरंत पोस्टिंग कर सकेंगे संभागीय आयुक्त और कलक्टर
अभियान के दौरान कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए संभागीय आयुक्तों और जिला कलक्टरों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में ‘नॉन-फील्ड’ (कार्यालयों या गैर-क्षेत्रीय पदों पर) कार्यरत तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को तुरंत प्रभाव से तहसीलों या उप-तहसीलों के रिक्त पदों पर पदस्थापित कर सकेंगे।
शिविर प्रभारी आईएएस और आरएएस अधिकारियों को मिलीं ये शक्तियां
’ग्रामीण सेवा शिविर-2026′ के लिए शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारियों को मौके पर ही समस्या समाधान के लिए जिला कलक्टर और उपखण्ड अधिकारी (SDO) स्तर की शक्तियां डेलीगेट की गई हैं:
- आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षण: राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार के लिए भूमि आरक्षित करने की जिला कलक्टर की शक्तियां अब इन शिविर प्रभारियों के पास होंगी।
- कृषि भूमि आवंटन: राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के अंतर्गत उपखण्ड अधिकारी की शक्तियां प्रदान की गई हैं।
- पाइपलाइन व नए मार्ग के मामले: राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 251-ए व नियमों के तहत अन्य खातेदार की जोत में से होकर भूमिगत पाइपलाइन बिछाने, नया मार्ग खोलने या मौजूदा मार्ग को चौड़ा करने की उपखण्ड अधिकारियों की शक्तियां भी इन्हें सौंपी गई हैं।
- राजस्व रिकॉर्ड शुद्धिकरण: राजस्व अभिलेख की त्रुटियों के शुद्धिकरण के प्रकरणों के निस्तारण हेतु उपखण्ड अधिकारी की शक्तियां दी गई हैं।
शिविरों में नियुक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी हुए शक्तिशाली
जमीनी स्तर के विवादों को तुरंत निपटाने के लिए शिविरों में तैनात तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को भी व्यापक अधिकार दिए गए हैं, जिनमें ग्राम पंचायतों की कुछ शक्तियां भी शामिल हैं:
- भूमि का बंटवारा: राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 53 की उप-धारा (1) व (2) के तहत भूमि के बंटवारे की तहसीलदार की शक्तियां शिविर के लिए नियुक्त तहसीलदार/नायब तहसीलदार को दी गई हैं।
- रास्ते व सुखाचार का अधिकार: राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 251 (1) के तहत रास्ते तथा अन्य निजी सुखाचार के अधिकार के तहत तहसीलदार की शक्तियां शिविरों के लिए नियुक्त समस्त नायब तहसीलदारों को प्रदान की गई हैं।
- ग्राम पंचायतों की शक्तियां हस्तांतरित: नामान्तरकरण (म्यूटेशन) के मामलों की ग्राम पंचायत की शक्तियां और राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम 18 के अन्तर्गत तहसीलदार की शक्ति शिविर में नियुक्त अधिकारियों को दी गई है।
- इसके साथ ही राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 128 के तहत अविवादित सीमा ज्ञान के मामलों को निर्णित करने तथा मार्गाधिकार या अन्य सुखाचार के वास्तविक उपयोग में विघ्न डाले जाने के मामलों को निपटाने की ग्राम पंचायत की शक्तियां भी अब शिविर में नियुक्त तहसीलदार/नायब तहसीलदार के पास होंगी।
समय अवधि 15 दिन से घटाकर 7 दिन की
प्रक्रिया को गति देने के लिए राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के तहत भूमि आवंटन के लिए आवेदन प्रस्तुत करने हेतु जारी होने वाली उद्घोषणा की निर्धारित 15 दिवस की कालावधि को कम कर अब मात्र 7 दिन कर दिया गया है।
भूमि आवंटन की राज्य सरकार की पॉवर कलक्टर को
एक और बड़े निर्णय के तहत, राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 102क के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु आरक्षित भूमि को स्थानीय निकायों के अधीन किए जाने की राज्य सरकार की शक्तियां भी जिला कलक्टर को डेलीगेट कर दी गई हैं। सरकार के इस कदम से स्थानीय स्तर पर ही भूमि प्रबंधन के काम तेजी से हो सकेंगे।