खैरथल-तिजारा/17 जून 2026 | नरेश गुनानी
खैरथल-तिजारा जिले की किशनगढ़बास पंचायत समिति के ईस्माईलपुर ग्राम पंचायत में आयोजित ‘ग्रामीण सेवा शिविर’ दो किसान परिवारों के जीवन में बड़ी खुशियां लेकर आया है। प्रशासनिक संवेदनशीलता और राजस्व विभाग के स्थानीय स्टाफ की सूझबूझ से एक ऐसा जमीनी बंटवारा आपसी रजामंदी के साथ संपन्न हुआ, जो लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच असहमति के कारण अटका हुआ था।
पटवारी और रिश्तेदारों की समझाइश से बनी बात
ईस्माईलपुर गांव के निवासी रोशन लाल पुत्र कुन्दन लाल और भौरे लाल पुत्र मंगू लाल (जाति जाटव) के बीच कई खसरा नंबरों की आराजी भूमि का बंटवारा लंबे समय से लंबित था। आपसी तालमेल और सहमति न बैठ पाने के कारण जमीन का कानूनी विभाजन नहीं हो पा रहा था, जिससे दोनों पक्षों में भीतर ही भीतर मनमुटाव की स्थिति बनी रहती थी।
इस गतिरोध को तोड़ने में स्थानीय प्रशासन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों काश्तकारों ने बताया कि शिविर के आयोजन से पहले ही हलका पटवारी ने उनके पास जाकर उन्हें समझाया। पटवारी ने उन्हें समझाया कि कानूनी रूप से स्पष्ट बंटवारा हो जाने से भविष्य की पीढ़ियों में कभी कोई लड़ाई-झगड़ा या विवाद नहीं होगा। पटवारी की इस सकारात्मक समझाइश और परिवार के कुछ प्रबुद्ध रिश्तेदारों के प्रेमपूर्वक समझाने के बाद दोनों काश्तकार जमीन के शांतिपूर्ण विभाजन के लिए राजी हो गए।
शिविर में ऑन-द-स्पॉट हुआ निपटारा
आपसी सहमति बनने के बाद दोनों पक्ष ईस्माईलपुर में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर पहुंचे। वहां उन्होंने खैरथल उपखण्ड अधिकारी और तहसीलदार के समक्ष अपनी सहखातेदारी भूमि (खसरा नंबर 1635, 1638, 1642, 1679, 1686, 1687) के विभाजन का आवेदन पत्र प्रस्तुत किया।
आवेदन मिलते ही प्रशासनिक अमला तुरंत एक्शन में आया:
- मौका निरीक्षण: तहसीलदार के निर्देश पर भू-अभिलेख निरीक्षक (गिरदावर) और हलका पटवारी ने तुरंत मौके पर जाकर जमीन का निरीक्षण किया।
- विभाजन प्रस्ताव: दोनों पक्षों की इच्छा और उनके बताए अनुसार बिना किसी विवाद के मौके पर ही जमीन का विभाजन प्रस्ताव (नक्शा) तैयार किया गया।
- तत्काल आदेश: तैयार प्रस्ताव को खैरथल तहसीलदार के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने शिविर में ही ऑन-द-स्पॉट विभाजन के कानूनी आदेश जारी कर दिए।
काश्तकारों के खिले चेहरे, सरकार का जताया आभार
बरसों पुराने इस जमीनी मामले का इतनी आसानी और सौहार्दपूर्ण माहौल में निपटारा हो जाने से रोशन लाल और भौरे लाल के चेहरे खुशी से खिल उठे। दोनों काश्तकारों ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि जो काम अदालतों और दफ्तरों के चक्कर काटकर भी मुमकिन नहीं लग रहा था, वह प्रशासन के सहयोग से चुटकियों में हो गया।
जमीन का मालिकाना हक स्पष्ट होने और भविष्य के बड़े विवाद की आशंका हमेशा के लिए खत्म होने पर दोनों परिवारों ने राज्य सरकार, मुख्यमंत्री ग्रामीण सेवा शिविर की इस अनूठी पहल और जिला प्रशासन का दिल से आभार व्यक्त किया।