ग्रामीण भारत को ‘एआई’ से जोड़ेगा ‘डिजिटल चरखा’ मॉडल: मणिपाल यूनिवर्सिटी और हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन के बीच ऐतिहासिक एमओयू
जयपुर, 06 जनवरी 2026
| योगेश शर्मा
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (एमयूजे) में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट – प्री-समिट सीरीज़’ के दौरान भारत के डिजिटल भविष्य को लेकर एक नई दिशा तय की गई। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘जन एआई राउंडटेबल’ और मणिपाल यूनिवर्सिटी व हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन के बीच हुआ समझौता ज्ञापन (MoU) रहा। इस पहल का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को केवल शहरों तक सीमित न रखकर ग्रामीण भारत की आजीविका और आत्मनिर्भरता का आधार बनाना है।
‘जन एआई’ और डिजिटल चरखा की परिकल्पना
हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन द्वारा परिकल्पित ‘जन एआई’ आंदोलन ग्रामीण भारत के लिए एआई के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक राष्ट्रीय अभियान है।
- मूल्य: यह पहल ग्राम स्वराज, स्वदेशी नवाचार और ‘एआई फॉर ऑल’ (AI for All) के सिद्धांतों पर आधारित है।
- मॉडल: विशेषज्ञों ने इसे ‘डिजिटल चरखा’ मॉडल का नाम दिया है, जहाँ तकनीक स्थानीय आजीविका, मानवीय गरिमा और आत्मनिर्भरता को सशक्त बनाने का माध्यम बनेगी।
प्रमुख वक्ताओं के विचार: शोध और जमीनी हकीकत का संगम
मणिपाल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नीति निपुण शर्मा ने स्वागत भाषण में कहा कि विश्वविद्यालयों को उन्नत शोध और जमीनी वास्तविकताओं के बीच सेतु का कार्य करना चाहिए ताकि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।
- मदन पदाकी (मैनेजिंग ट्रस्टी, हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन): उन्होंने ‘जन एआई’ को एक जन-केंद्रित आंदोलन बताया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण समुदायों में पहले से मौजूद बुद्धिमत्ता को पहचानकर उसे आधुनिक तकनीक से सशक्त करना है।
- प्रो. रमेश रस्कर (एमआईटी, अमेरिका): मुख्य भाषण में उन्होंने ‘एआई-प्रथम गांव’ की अवधारणा पेश की। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय बुद्धिमत्ता वैश्विक ज्ञान नेटवर्क से जुड़ती है, तभी विकेन्द्रीकृत विकास संभव है।
परिवर्तन की लहर: सीरोही के छात्रों का अनुभव
राउंडटेबल के दौरान सबसे प्रेरणादायक क्षण तब आया जब सीरोही के आदर्श गांव से आए छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे व्यावहारिक एआई कौशल सीखने से न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा, बल्कि उनकी रोजगार-योग्यता (Employability) में भी सुधार हुआ। इसने साबित किया कि समुदाय-नेतृत्व वाली एआई पहल में ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने की क्षमता है।
एमओयू और भविष्य की राह
कार्यक्रम के अंत में हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन और मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर:
- संयुक्त शोध: ग्रामीण परिवेश के अनुकूल एआई समाधानों पर शोध करेंगे।
- क्षमता निर्माण: छात्रों और ग्रामीण युवाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
- समुदाय-नेतृत्व वाले कार्यक्रम: स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए एआई आधारित प्रोजेक्ट्स संचालित करेंगे।
कार्यक्रम में कर्नाटक डिजिटल इकोनॉमी मिशन के सीईओ संजीव गुप्ता, विप्रो जयपुर के लोकेशन हेड योगेश अग्रवाल और डिजाइन रणनीतिकार दीपा प्रह्लाद जैसे विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया। अंत में एमयूजे की प्रोवोस्ट डॉ. नीतू भटनागर ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ एक समावेशी डिजिटल भविष्य का संकल्प दोहराया।

