सुनील शर्मा
जयपुर | 24 अप्रैल, 2026
राजस्थान में भीषण गर्मी की दस्तक के बीच ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चलाए गए दो दिवसीय विशेष राज्यव्यापी अभियान ने प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में जल संकट की चुनौतियों को न केवल कम किया है, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी मजबूती प्रदान की है। प्रशासन की इस सक्रियता ने “सुशासन” के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए त्वरित समाधान का एक नया मानक स्थापित किया है।
त्वरित कार्रवाई: मरम्मत और सुधार के बड़े आँकड़े
अभियान के दौरान युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए तकनीकी टीमों ने बंद पड़े संसाधनों को पुनः चालू किया। दो दिनों के भीतर किए गए प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- हैंडपंप मरम्मत: कुल 1,535 खराब हैंडपंपों को ठीक कर ग्रामीणों को राहत दी गई।
- लीकेज सुधार: पाइपलाइनों में होने वाले 911 लीकेज दुरुस्त किए गए, जिससे पानी की बर्बादी रुकी।
- अन्य कार्य: लगभग 329 विभिन्न पेयजल सुधार कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
इन प्रयासों से उन क्षेत्रों में भी सुचारू जलापूर्ति संभव हो सकी है, जहाँ तकनीकी खराबी के कारण जल संकट गहरा रहा था।
योजनाबद्ध निरीक्षण: धरातल पर उतरा प्रशासन
इस अभियान की सफलता का मुख्य कारण “प्रशासनिक विकेंद्रीकरण” रहा। पहली बार जिला कलेक्टर से लेकर तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी (BDO) जैसे उच्चाधिकारी स्वयं गांवों की चौखट तक पहुंचे।
निरीक्षण का विवरण:
- कुल 2,677 विभिन्न कार्यों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया।
- इसमें जल जीवन मिशन के 407 और अमृत 2.0 योजना के 80 कार्यों की समीक्षा की गई।
- 77 ग्रीष्मकालीन कंटीन्जेंसी कार्यों की प्रगति जांची गई ताकि आगामी महीनों में पानी की किल्लत न हो।
शिकायतों का ‘सुपरफास्ट’ निस्तारण
प्रशासनिक मशीनरी की दक्षता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की 450 तकनीकी टीमों ने शिकायतों पर तत्काल प्रतिक्रिया दी।
रिकॉर्ड समाधान: अभियान के दौरान कुल 2,792 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 2,775 शिकायतों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया। यह लगभग 99% की समाधान दर है, जो सरकारी कार्यप्रणाली में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
निष्कर्ष: जनहित के प्रति नई प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन के अनुरूप, यह अभियान केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रहकर सीधे जनता के जीवन से जुड़ा। पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकता को प्राथमिकता देकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण विकास और विशेषकर गर्मियों में जल प्रबंधन उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रशासनिक सक्रियता और तकनीकी टीमों के समन्वय ने यह सुनिश्चित किया है कि राजस्थान के गांवों में जल आपूर्ति की व्यवस्था अब पहले से अधिक विश्वसनीय और सुदृढ़ है। आने वाले दिनों में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे।