ग्रहों की दशाएं ही बदलती हैं हमारे जीवन की दिशा: सुख-दुख का ज्योतिषीय आधार

एस्ट्रो गिरीश | 9540393555

संसार में हर व्यक्ति सुख की कामना करता है और दुख से दूर भागना चाहता है। लेकिन जीवन का चक्र जन्म-जन्मांतर के कर्मों और प्रारब्ध (भाग्य) से बंधा होता है। जैसे दिन के बाद रात और रात के बाद दिन का आना निश्चित है, वैसे ही हमारे जीवन में सुख और दुख का आगमन भी निरंतर होता रहता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस सुख-दुख के चक्र को निर्धारित करने में ग्रहों की दशाओं की मुख्य भूमिका होती है।

​ग्रहों की दशाएं और ऋतुओं का चक्र

​हमारे जीवन में ग्रहों की दशाएं ठीक उसी तरह आती-जाती रहती हैं जैसे मौसम या ऋतुएं। जब प्रतिकूल समय आता है, तो व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक या आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है।

कष्टकारी समय से कैसे बचें?

जिस प्रकार हम भीषण ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़ों और हीटर का सहारा लेते हैं, या तपती गर्मी से बचने के लिए ठंडे वातावरण का प्रबंध करते हैं; ठीक उसी प्रकार ज्योतिष शास्त्र कठिन समय के लिए “सुरक्षा कवच” प्रदान करता है। ग्रहों के अनुसार बताए गए उचित उपाय करके हम कष्टों की तीव्रता को कम कर सकते हैं और जीवन को सुगम बना सकते हैं।

​कौन सा ग्रह देता है सबसे ज्यादा कष्ट?

​ज्योतिषीय गणनाओं के माध्यम से जन्म कुंडली और वर्ग कुंडलियों में शुभ-अशुभ तथा बली-निर्बली ग्रहों की पहचान की जाती है।

  • अशुभ और बली ग्रह: यदि कुंडली का कोई अशुभ ग्रह अत्यधिक बलवान (बली) है, तो उसकी महादशा या अंतर्दशा के दौरान व्यक्ति को भारी संघर्ष और कष्ट झेलने पड़ सकते हैं। यही वह समय होता है जब ग्रह शांति के उपाय अनिवार्य हो जाते हैं।
  • शुभ और निर्बली ग्रह: यदि आपके कल्याणकारी और शुभ ग्रह कमजोर हैं, तो वे चाहकर भी आपको पूरा लाभ नहीं दे पाते। ऐसे में उन्हें रत्नों, मंत्रों या दान के माध्यम से ‘सबल’ बनाना आवश्यक होता है।

​दशाओं का प्रभाव और समय पर परीक्षण

​ग्रह अपनी स्थिति, युति (मिलन) और दृष्टि के अनुसार पूरे जीवन फल तो देते हैं, लेकिन उनके परिणामों की प्रबलता उनकी महादशा और अंतर्दशा में ही दिखाई देती है।

एक महत्वपूर्ण तुलना:

जिस प्रकार हम अपने शरीर का हेल्थ चेकअप (जैसे कोलेस्ट्रॉल टेस्ट) कराते हैं ताकि समय रहते इलाज कर सकें, ठीक उसी तरह हर व्यक्ति को अपनी जन्म कुंडली का परीक्षण किसी कुशल ज्योतिषी से कराना चाहिए। इससे यह पता चलता है कि कौन सा ‘गुड कोलेस्ट्रॉल’ (शुभ ग्रह) कमजोर है और कौन सा ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ (अशुभ ग्रह) बढ़कर नुकसान पहुँचा रहा है।

 

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