गोगुन्दा में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान-2.0 के कार्यों की होगी जाँच, दोषियों पर गिरेगी गाज
| नरेश गुनानी
जयपुर, 23 फरवरी 2026: राजस्थान विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान-2.0 में कथित अनियमितताओं का मुद्दा गूँजा। पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने सदन को आश्वस्त किया कि विधानसभा क्षेत्र गोगुन्दा में इस अभियान के तहत स्वीकृत कार्यों और उनमें हुए खर्च की विस्तृत जाँच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कम खर्च और गलत तकनीकी आकलन पर उठे सवाल
प्रश्नकाल के दौरान विधायक प्रताप लाल भील द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए पंचायतीराज मंत्री ने स्वीकार किया कि गोगुन्दा क्षेत्र में योजना के अंतर्गत हुए कार्यों में खर्च की गई राशि, स्वीकृत बजट से कम दिखाई दे रही है।
मंत्री ने इसके पीछे तीन संभावित कारणों की ओर इशारा किया:
- संबंधित अधिकारी द्वारा कार्य का तकनीकी आकलन (तकमीना) सही तरीके से नहीं बनाया जाना।
- प्रशिक्षकों द्वारा अधिकारियों को समुचित प्रशिक्षण न दिया जाना।
- मौके पर कार्य का पूर्ण न होना या अधूरा छोड़ दिया जाना।
इन विसंगतियों को देखते हुए मंत्री ने सदन के पटल पर इन सभी कार्यों की निष्पक्ष जाँच कराने का भरोसा दिलाया।
1754 कार्यों के लिए करोड़ों का बजट
इससे पूर्व विधायक के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में पंचायतीराज मंत्री ने गोगुन्दा क्षेत्र के विकास कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- प्रभावित क्षेत्र: पंचायत समिति बड़गांव, गोगुन्दा, सायरा और कोटड़ा।
- व्याप्ति: 36 ग्राम पंचायतों के कुल 80 गाँव।
- कार्य संख्या: अभियान के प्रथम एवं द्वितीय चरण के तहत कुल 1754 कार्य स्वीकृत हैं।
- व्यय विवरण: 15 फरवरी 2026 तक इन कार्यों पर 982.87 लाख रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है।
पंचायतीराज मंत्री ने पंचायत समितिवार विस्तृत विवरण सदन के पटल पर रखते हुए दोहराया कि सरकार भ्रष्टाचार और कार्य में लापरवाही को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चल रही है।
