गुर्जर महापंचायत: सरकार से 7 मांगों पर बनी सहमति, लेकिन ट्रैक पर जारी रहा विरोध
पीलूपुरा में महापंचायत का समापन, लेकिन युवाओं ने जताई नाराजगी
Reported By: sanjay singh
Edited By :Naresh Gumani
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 08,2025
भरतपुर (राजस्थान):
राजस्थान के भरतपुर जिले के पीलूपुरा गांव में रविवार को आयोजित गुर्जर समाज की महापंचायत समाप्त हो गई है। महापंचायत का नेतृत्व गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक और भाजपा नेता विजय बैंसला ने किया। सैकड़ों गांवों से हजारों की संख्या में गुर्जर समाज के लोग इस महापंचायत में शामिल हुए।
विजय बैंसला का भावुक संबोधन
विजय बैंसला ने मंच से लाल पगड़ी पहनकर समाज को संबोधित किया और कहा,
“ये पगड़ी बैंसला साहब की आखिरी निशानी है। मुझे हल की तरह चलाओ, मैं समाज के लिए हमेशा तैयार हूं।”
इसके बाद सरकार की तरफ से भेजे गए मसौदे को मंच से पढ़कर सुनाया गया, जिसे समाज के नेताओं ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही महापंचायत समाप्त करने का औपचारिक ऐलान कर दिया गया।
सरकार से बनी ये 7 अहम सहमतियां:
- MBC आरक्षण विधेयक को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाएगा।
- पिछले आरक्षण आंदोलनों के दौरान हुए समझौतों की पूरी पालना सुनिश्चित की जाएगी।
- गुर्जर समाज को सरकारी नौकरियों में 5% आरक्षण का पूरा लाभ मिलेगा।
- देवनारायण योजना को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
- आंदोलनों के दौरान दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
- आंदोलन में मारे गए लोगों के आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाएगी।
- रीट भर्ती 2018 में बचे हुए 372 पदों पर जल्द नियुक्ति की जाएगी।
रेलवे ट्रैक पर फिर गरमाया माहौल
हालांकि महापंचायत समाप्त हो गई, लेकिन इसका असर दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर नजर आया।
महापंचायत के फैसलों से असंतुष्ट युवाओं ने कोटा-मथुरा पैसेंजर ट्रेन को पीलूपुरा में रोक दिया। ट्रैक पर प्रदर्शनकारी बैठ गए, जिससे इस व्यस्त रूट की कई ट्रेनें प्रभावित हो गईं।
यात्रियों को भारी परेशानी
रेलवे ट्रैक पर जमा भीड़ के कारण मथुरा और सवाई माधोपुर के बीच ट्रेनें लंबे समय तक रुकी रहीं। कई यात्रियों को मजबूरन हिंडौन तक पैदल चलना पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने कुछ जगहों पर रेल पटरियों को भी नुकसान पहुंचाया है।
प्रशासन की स्थिति पर नजर
जिला प्रशासन और रेलवे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है।
सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और रेलवे रूट को खाली करवाने की कोशिशें जारी हैं।
एक तरफ सरकार और गुर्जर समाज के बीच 7 महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी है, जिससे राजनीतिक समाधान की उम्मीद जगी है, लेकिन दूसरी तरफ जमीनी असंतोष अब भी बाकी है।
रेलवे ट्रैक पर विरोध इस बात का संकेत है कि गुर्जर समाज का एक वर्ग अब भी खुद को आश्वस्त नहीं मान रहा।

