गुर्जर आरक्षण आंदोलन की फिर गूंज, पीलूपुरा में विजय बैंसला की अगुवाई में महापंचायत

राजस्थान


गुर्जर आरक्षण आंदोलन की फिर गूंज, पीलूपुरा में विजय बैंसला की अगुवाई में महापंचायत

Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 07,2025

By Telegraph Times ,भरतपुर, 7 जून – राजस्थान में एक बार फिर गुर्जर आरक्षण आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने भरतपुर ज़िले के पीलूपुरा गांव में सुबह 8 बजे से महापंचायत का आयोजन किया है। यह इलाका सिर्फ भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी गुर्जर आंदोलन का केंद्र रहा है।


पीलूपुरा क्यों बना आंदोलन का केंद्र?

पीलूपुरा वही स्थान है, जहां वर्ष 2008 में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में गुर्जरों ने आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन किया था। उस दौरान पुलिस फायरिंग में 72 लोगों की जान गई थी, जिसने इस मांग को राष्ट्रीय पटल पर पहुंचा दिया था। कर्नल बैंसला की इसी ‘संघर्ष भूमि’ को फिर से आंदोलन का आधार बनाकर महापंचायत का आयोजन किया गया है।

अब उनके बेटे विजय बैंसला उसी भूमिका में हैं – वे आंदोलन की कमान संभाल चुके हैं। गांव-गांव में पीले चावल बांटे जा रहे हैं, सोशल मीडिया पर स्थानीय भाषा में भावनात्मक अपील की जा रही है।

Images by aparichitsource

विजय बैंसला क्यों नाराज हैं बीजेपी से?

विजय बैंसला कभी बीजेपी के टिकट पर देवली-उनियारा से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, पर हार गए। इसके बाद दो बार लोकसभा और उपचुनाव में भी टिकट की मांग की, लेकिन पार्टी ने नजरअंदाज किया। वर्तमान में वे गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष हैं और सत्ताधारी बीजेपी सरकार पर सीधा हमला बोल चुके हैं।

उनका आरोप है कि सरकार ने पिछली समझौतों को निभाया नहीं है और आंदोलन से जुड़े केसों को वापस लेने की बजाय जमीन कुर्की के आदेश दे दिए गए हैं।


गुर्जर समाज की प्रमुख मांगें:

  1. MBC (More Backward Class) को मिलने वाला 5% आरक्षण संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाए ताकि कानूनी अड़चनों से बचा जा सके।
  2. राजस्थान स्तर पर रोस्टर प्रणाली में बदलाव किया जाए ताकि MBC वर्ग को वास्तविक लाभ मिल सके।
  3. आरक्षण आंदोलन से जुड़े सभी मुकदमे वापस लिए जाएं, ज़मीन कुर्क करने के आदेश रद्द किए जाएं।
  4. देवनारायण योजना के तहत स्कूटी, छात्रवृत्ति, और अन्य लाभ अब तक नहीं मिल रहे – इनका शीघ्र क्रियान्वयन हो।
  5. जोधपुर हाईकोर्ट के हलफनामे में सरकारी भ्रम – पहले सामान्य, फिर ओबीसी और अंत में MBC वर्ग को आरक्षण देने की बात कही गई, जबकि इसकी प्रक्रिया उलट होनी चाहिए।
  6. RJS (राजस्थान न्यायिक सेवा) में बैकलॉग भरना, आरक्षण आंदोलन के शहीदों के परिजनों को नौकरी और मुआवजा

प्रशासन सतर्क, वार्ता जारी

विजय बैंसला के आह्वान के बाद से पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। प्रशासनिक स्तर पर समिति से वार्ता के प्रयास जारी हैं, लेकिन संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि अब सरकार को समिति के मसौदे पर खुद आकर बातचीत करनी होगी।


राजनीतिक मायने भी गहरे

विजय बैंसला का बीजेपी से मोहभंग और महापंचायत की आड़ में सरकार पर हमला केवल सामाजिक नहीं, राजनीतिक संदेश भी दे रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह आंदोलन भविष्य में राजनीतिक समीकरण को प्रभावित करेगा?


 

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