जयपुर | सुनील शर्मा | राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति में गुरु परंपरा, उनके अतुलनीय योगदान और चरित्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।
ज्ञान के दीपक और चरित्र के निर्माता हैं गुरु
वासुदेव देवनानी ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु केवल ज्ञान प्रदान करने वाले माध्यम ही नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्र, संस्कृति और समाज में चरित्र निर्माण के शाश्वत प्रकाश स्तंभ हैं।
”जीवन के प्रत्येक मोड़ पर जब मनुष्य अंधकार और भ्रम की स्थिति में होता है, तब गुरु सत्य का आलोक बनकर उसका मार्गदर्शन करते हैं। गुरु न केवल ज्ञान के दीपक हैं, बल्कि वे आत्मा की दिशा तय करने वाले द्रष्टा भी हैं।”
महर्षि वेदव्यास जयंती और कृतज्ञता का महान पर्व
विधानसभा अध्यक्ष ने गुरु पूर्णिमा के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह पावन दिन भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महान अवसर है। यह पर्व हर नागरिक को ज्ञान, संस्कार और सत्य के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान का आह्वान
वासुदेव देवनानी ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करते हुए उनसे आह्वान किया:
- शिक्षा और संस्कारों का समावेश: युवा अपने गुरुओं द्वारा दी गई शिक्षा और जीवन मूल्यों को आत्मसात करें।
- राष्ट्र निर्माण में भागीदारी: प्राप्त ज्ञान और उच्च संस्कारों के बल पर देश की प्रगति और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना और कामना की कि गुरु पूर्णिमा का यह पवित्र पर्व सभी प्रदेशवासियों के जीवन में ज्ञान, सद्बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे।