गुप्त नवरात्र पर पुष्कर में शुरू हुई नौ दिवसीय अखंड रामधुनि, मध्यप्रदेश से पहुंचे 25 श्रद्धालु

गुप्त नवरात्र पर पुष्कर में शुरू हुई नौ दिवसीय अखंड रामधुनि, मध्यप्रदेश से पहुंचे 25 श्रद्धालु
(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/अजमेर

Edited By : सुनील शर्मा 
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 26,2025

धार्मिक नगरी पुष्कर में गुरुवार से गुप्त नवरात्र का शुभारंभ भक्तिमय माहौल में हुआ। इसी के साथ पुष्कर सरोवर के यज्ञ घाट स्थित सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर में नौ दिवसीय अखंड संगीतमय रामधुनि की शुरुआत हो गई।

हर वर्ष की तरह इस बार भी सिद्धेश्वर हनुमान भक्त मंडल की ओर से आयोजित इस अखंड रामधुनि में सैकड़ों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। विशेष बात यह है कि इस बार मध्यप्रदेश से 25 भक्तों की टोली पुष्कर पहुंची है, जो स्थानीय भक्तों व तीर्थ पुरोहितों के साथ मिलकर दिन-रात राम नाम संकीर्तन कर रही है।

भक्तों की अलग-अलग टुकड़ियाँ बनाई गई हैं, जो बारी-बारी से मंदिर में “हरे रामा, हरे कृष्णा” की संगीतमय धुनों के साथ अखंड कीर्तन में लीन हैं। रामधुनि का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्व कल्याण व अच्छी वर्षा की कामना भी है।

पं. जेपी गुरू के सान्निध्य में हुआ शुभारंभ

रामधुनि की शुरुआत गुरुवार सुबह पंडित जेपी गुरू के सान्निध्य में की गई। उन्होंने मंत्रोच्चार व पूजा-अर्चना के साथ रामधुनि का शुभारंभ कराया। पं. गुरू ने बताया कि यह आयोजन गुप्त नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित किया जाता है, जिसमें दिन-रात बिना रुके राम नाम का संकीर्तन चलता है। यह नवमी तक लगातार 24 घंटे संचालित रहेगा।

श्रद्धालुओं में उमंग, मंदिर परिसर भक्तिमय

हनुमान मंदिर का संपूर्ण परिसर भक्ति रस में डूबा हुआ है। श्रद्धालु दीप प्रज्वलन, भजन-कीर्तन, रामायण पाठ और अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं। मंदिर में फूलों की आकर्षक सजावट की गई है, वहीं पूरे यज्ञ घाट क्षेत्र में राम नाम के उच्चारण से भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, इस अखंड रामधुनि के आयोजन से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जनकल्याण की भावना जागृत होती है।

आयोजन की खास बातें:

  • स्थान: सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर, यज्ञ घाट, पुष्कर
  • अवधि: 9 दिन (गुप्त नवरात्र के अंत तक)
  • उद्देश्य: विश्व कल्याण एवं अच्छी वर्षा की कामना
  • विशेष भागीदारी: मध्यप्रदेश से आए 25 भक्त
  • आयोजक: सिद्धेश्वर हनुमान भक्त मंडल
  • आध्यात्मिक नेतृत्व: पं. जेपी गुरू

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पुष्कर की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजने का एक अनुपम प्रयास है। आगामी दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और भी बढ़ने की संभावना है।

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