गागरोन दुर्ग में इतिहास रचा—5100 विद्यार्थियों की सामूहिक चित्रकारी से विश्व रिकॉर्ड दर्ज
पंच गौरव योजना के तहत आयोजित चित्रकला महोत्सव, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में आधिकारिक दर्ज
| नरेश गुनानी
जयपुर, 10 दिसंबर। झालावाड़ स्थित विश्व धरोहर स्थल गागरोन दुर्ग ने बुधवार को ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की, जब 5100 विद्यार्थियों ने एक साथ चित्रकारी कर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में विश्व रिकॉर्ड बनाया। राज्य सरकार की पंच गौरव योजना के तहत आयोजित गागरोन दुर्ग चित्रकला महोत्सव ने जिले में कला, विरासत और नवाचार की अद्वितीय छाप छोड़ी।
सुबह से शुरू हुए इस आयोजन में ऐतिहासिक दुर्ग परिसर में ऊर्जा, उत्साह और रंगों की बहार देखने को मिली। फोर्ट की दीवारों, विशाल द्वारों और प्राकृतिक खूबसूरती के बीच जब हजारों हाथों ने कैनवास पर गागरोन की ऐतिहासिक भव्यता उकेरी, तो वातावरण कला के महाकुंभ में बदल गया।
रंगों से सराबोर प्रांगण— यादगार क्षण
जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ ने इस उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताया। उनके अनुसार, गागरोन दुर्ग सदियों तक इतिहास का साक्षी रहा, लेकिन आज यहां एक अनोखा सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रवाह देखने को मिला। यह आयोजन केवल रिकॉर्ड बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की सृजनशीलता, जिले की धरोहर पहचान एवं सांस्कृतिक चेतना को समर्पित पहल है।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल कला प्रतिभा का मंच बना, बल्कि गागरोन दुर्ग को राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय कला, पर्यटन और सांस्कृतिक अध्याय में नए केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
रामबुर्ज पर खेल का रोमांच—बास्केटबॉल मैच रहा आकर्षण
कार्यक्रम में पंच गौरव थीम के तहत बास्केटबॉल मैच आयोजित किया गया। झालावाड़ गर्ल्स और बॉयज़ टीमों के मुकाबले का उत्साह चरम पर रहा। जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ और पुलिस अधीक्षक अमित कुमार स्वयं मैदान में उतरे, जिससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा। मैच में गर्ल्स टीम विजेता रही।
पंच गौरव की प्रदर्शनी— आमजन के लिए आकर्षण का केंद्र
गागरोन दुर्ग, संतरा, सागवान, कोटा स्टोन और बास्केटबॉल—इन पांच मुख्य गौरव विषयों पर स्टॉल लगाए गए। इनमें स्थानीय उद्योग, पर्यटन महत्व, उत्पाद और सांस्कृतिक पहचान का प्रभावी प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में आए लोगों ने इसकी व्यापकता को सराहा।
सुचारू प्रबंधन— विभागीय समन्वय की मिसाल
कार्यक्रम का प्रबंधन जिप सीईओ शंभूदयाल मीणा और एसडीएम अभिषेक चारण के निर्देशन में किया गया। व्यवस्थाओं में सुरक्षा, आवागमन, पेयजल, चिकित्सा, बिजली, मंच प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण को व्यवस्थित रूप से लागू किया गया। विद्यार्थियों और आगंतुकों को हर स्तर पर सुविधा दी गई।
पौधारोपण से जुड़ा पर्यावरणीय संदेश
दुर्ग प्रांगण में संतरा और सागवान के पौधों का रोपण किया गया। जिला प्रशासन ने पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी। इसी क्रम में मनरेगा महिला श्रमिकों को विशेष रूप से धन्यवाद दिया गया, जिन्होंने 15 दिनों से दुर्ग परिसर की सफाई और झाड़ियां हटाने में श्रम किया था।
वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और अनेक संस्थाएं रहीं उपस्थित
आयोजन में जिला प्रमुख प्रेम बाई दांगी, आरपीएससी के पूर्व अध्यक्ष श्याम सुंदर शर्मा, हर्षवर्धन शर्मा, उप वन संरक्षक सागर पंवार, अतिरिक्त जिला कलेक्टर अनुराग भार्गव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद मीणा, उपखण्ड अधिकारी अभिषेक चारण, उपखण्ड अधिकारी भावना गोमे, प्रधान भावना झाला और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस आयोजन ने गागरोन दुर्ग को कला, संस्कृति, इतिहास और पर्यटन की लाइमलाइट में स्थापित कर दिया। 5 हजार से अधिक विद्यार्थियों द्वारा एक साथ चित्र बनाना न केवल जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है, बल्कि प्रदेश और देश के लिए एक सांस्कृतिक मिसाल भी बन गया।