मोहाली/नई दिल्ली, 25 मई 2026 | गौरव कोचर
भारत को एक डिजिटल महाशक्ति बनाने और ‘विकसित भारत दृष्टिकोण’ को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) ने संयुक्त रूप से ‘गवर्नेंस समिट 2026’ का आयोजन किया। 23 मई 2026 को आईएसबी के मोहाली परिसर में आयोजित इस एक दिवसीय शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय “विकसित भारत के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)” था।
इस प्रतिष्ठित सम्मेलन के चौथे संस्करण में सरकार, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के शीर्ष नीति निर्माता और विशेषज्ञ एक मंच पर आए। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य डिजिटल वाणिज्य, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक शासन (Governance) में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए एआई-संचालित समाधानों को आगे बढ़ाना था।
हर नागरिक तक पहुंचे एआई का लाभ: इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सचिव
सम्मेलन का शुभारंभ भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन के उद्घाटन भाषण से हुआ। अपने संबोधन में श्री कृष्णन ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े नागरिक तक एआई तकनीक का लाभ पहुंचाने की सरकारी प्रतिबद्धता को दोहराया।
”कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत को उत्पादकता बढ़ाने, शासन व्यवस्था में सुधार करने और स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विनिर्माण (Manufacturing) व वित्तीय समावेशन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पहुंच का विस्तार करने का एक परिवर्तनकारी अवसर प्रदान करती है।”
— श्री एस. कृष्णन, सचिव, MeitY
कौशल आधारित नौकरियों पर एआई के प्रभाव और चिंताओं को स्वाभाविक बताते हुए उन्होंने आश्वस्त किया कि भारत अपनी अनूठी क्षमताओं के बल पर समावेशी विकास (Inclusive Growth) के लिए इस तकनीक का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
चार प्रमुख विषयों पर गहन विमर्श
दिन भर चले इस सम्मेलन में देश के ज्वलंत मुद्दों और तकनीकी संभावनाओं को रेखांकित करते हुए चार विषयगत पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं:
- डिजिटल वाणिज्य में एआई की भूमिका: व्यापार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने के नए तौर-तरीके।
- महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा: इंटरनेट और डिजिटल स्पेस को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना।
- स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और वहनीयता: एआई के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं को किफायती और हर मरीज तक सुलभ बनाना।
- रोजगार सृजन एवं डिजिटल उद्यमिता: नई तकनीक के दौर में युवाओं के लिए आजीविका और स्टार्टअप के अवसरों को बढ़ावा देना।
इसके अतिरिक्त, एक विशेष गोलमेज (Roundtable) सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें राज्य सरकारों से लेकर ग्राम पंचायतों तक, यानी प्रशासन के सबसे निचले स्तर तक सार्वजनिक सेवा वितरण (Public Service Delivery) को बेहतर बनाने में एआई की संचालन क्षमता का विश्लेषण किया गया।
दीर्घकालिक राष्ट्रीय मिशन के रूप में एआई की आवश्यकता
भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी (ISB) के एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यकारी निदेशक, प्रोफेसर अश्विनी छत्रे ने एआई की महत्वाकांक्षाओं को व्यावहारिक और सुरक्षित शासन ढांचे में बदलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई को केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के भविष्य को आकार देने वाले एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए।
प्रोफेसर छत्रे ने आगाह किया कि उभरते एआई परिदृश्य में असमानता को कम करने, आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ाने और रोजगार के भविष्य को सुरक्षित करने जैसे आयामों पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने उचित सुरक्षा उपायों, सामाजिक सुरक्षा तंत्रों और सकारात्मक प्रयासों के माध्यम से एआई के अवसरों तक समाज के सभी वर्गों की समान पहुंच सुनिश्चित करने की वकालत की।
देश-विदेश के दिग्गज संस्थानों की रही भागीदारी
इस शिखर सम्मेलन में देश के चुनिंदा और अग्रणी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। विचार-मंथन के इस मंच पर नीतिगत रणनीतियों को साझा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रालयों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रमुख संस्थान शामिल हुए:
- निजी व कॉर्पोरेट क्षेत्र: रिलायंस रिटेल, मास्टरकार्ड, अपोलो हॉस्पिटल्स।
- अकादमिक व शोध संस्थान: आईआईटी मद्रास, आईएसबी मोहाली।
- वैश्विक व सुरक्षा संगठन: यूनिसेफ इंडिया (UNICEF India) और पंजाब पुलिस।
यह सम्मेलन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग न केवल तकनीकी प्रगति के लिए, बल्कि जवाबदेह शासन और सामाजिक समावेशन को मजबूत करने के लिए करने जा रहा है।