गणतंत्र दिवस परेड 2026: कर्तव्य पथ पर दिखेगा राजस्थान की उस्ता कला का जादू
| नरेश गुनानी
नई दिल्ली/जयपुर। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर इस वर्ष नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का डंका बजेगा। शुक्रवार को आयोजित फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान राजस्थान की झांकी ने अपने अनूठे शिल्प और जीवंत प्रदर्शन से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस वर्ष की झांकी का मुख्य आकर्षण बीकानेर की विश्वप्रसिद्ध ‘उस्ता कला’ है।
झांकी की मुख्य विशेषताएँ: “मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श”
झांकी के डिजाइनर और पर्यवेक्षक हर शिव कुमार शर्मा के अनुसार, इस वर्ष की थीम “राजस्थान: मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” रखी गई है। झांकी को तीन मुख्य भागों में विभाजित किया गया है:
- अग्र भाग (Front Part): झांकी के सबसे आगे राजस्थान के प्रसिद्ध लोक वाद्य ‘रावणहट्टा’ का वादन करते एक कलाकार की 180 डिग्री तक घूमने वाली प्रतिमा लगाई गई है। इसके साथ ही उस्ता कला से अलंकृत सुराहियां और पारंपरिक दीपक प्रदर्शित किए गए हैं।
- मध्य भाग (Trailer Part): इस हिस्से में उस्ता कला से सजी विशाल कुप्पियां और हस्तशिल्प पर बारीकी से काम करते हुए कारीगरों को दिखाया गया है। यह राज्य की लुप्त होती कलाओं के संरक्षण और जीवंतता का प्रतीक है।
- पृष्ठ भाग (Rear Part): झांकी के पिछले हिस्से में एक विशाल ऊँट और उस पर सवार राजस्थानी योद्धा की प्रतिमा है, जो मरुस्थलीय जीवन और शौर्य को दर्शाती है। इसके चारों ओर स्वर्ण कारीगरी वाले मेहराब उस्ता कला की बारीकी को बयां कर रहे हैं।
सांस्कृतिक प्रदर्शन और टीम
झांकी की भव्यता को और बढ़ाने के लिए इसके चारों ओर ‘गैर नृत्य’ करते कलाकारों का दल अपनी प्रस्तुति दे रहा है। लोक संगीत और पारंपरिक वेशभूषा ने रिहर्सल के दौरान ही दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रमुख मार्गदर्शक और टीम:
राजस्थान ललित कला अकादमी के सचिव डॉ. रजनीश हर्ष ने बताया कि इस झांकी का निर्माण राज्य की उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता और उप सचिव अनुराधा गोगिया के कुशल निर्देशन में किया गया है।
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विशेषता |
विवरण |
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मुख्य कला |
बीकानेर की उस्ता कला (ऊँट की खाल पर स्वर्ण नक्काशी) |
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लोक वाद्य |
रावणहट्टा |
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लोक नृत्य |
गैर नृत्य |
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प्रतीक |
ऊँट और रेगिस्तानी जीवन |

