गणतंत्र दिवस परेड-2026: कर्तव्य पथ पर दिखेगा ‘मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श’, राजस्थान की झांकी में उस्ता कला और रावणहत्था का अनूठा संगम
जयपुर/नई दिल्ली | 25 जनवरी 2026
| नरेश गुनानी
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय परेड में राजस्थान की झांकी एक बार फिर दुनिया को मंत्रमुग्ध करने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में तैयार की गई इस वर्ष की झांकी प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अद्वितीय शिल्पकला और लोक परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन करेगी।
इस वर्ष राजस्थान की झांकी का विषय (थीम) ‘राजस्थान-मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श’ रखा गया है। इसके माध्यम से मरुधरा की कलात्मक ऊंचाइयों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।

उस्ता कला: बीकानेर की विश्व विख्यात शिल्पकला का प्रदर्शन
झांकी का सबसे प्रमुख आकर्षण बीकानेर की ऐतिहासिक ‘उस्ता कला’ होगी। यह कला अपनी सूक्ष्मता और सोने की बारीक नक्काशी के लिए पूरी दुनिया में बेजोड़ मानी जाती है।
- झांकी में उस्ता कला से सुसज्जित भव्य सुराही और पारंपरिक कुप्पियों का प्रदर्शन किया जाएगा।
- यह शिल्पकारी राजस्थान के हस्तशिल्पियों की पीढ़ियों पुरानी सृजनशीलता और उत्कृष्ट कारीगरी को दुनिया के सामने रखेगी।
तकनीक और संगीत का संगम: 180 डिग्री घूमती प्रतिमा
इस वर्ष झांकी में एक अनूठा तकनीकी नवाचार भी देखने को मिलेगा। राजस्थान के प्राचीन लोक वाद्ययंत्र रावणहत्था का वादन करते हुए एक कलाकार की प्रतिमा को शामिल किया गया है, जो 180 डिग्री पर घूमती हुई नजर आएगी। यह गतिशील प्रतिमा राजस्थान के लोक संगीत की गहराई और सांस्कृतिक जीवंतता का प्रभावशाली अहसास कराएगी।
झांकी के अन्य प्रमुख तत्व
राजस्थान की झांकी मरुस्थलीय जीवन और उत्सवों का एक संपूर्ण पैकेज होगी, जिसमें शामिल हैं:
- रेगिस्तान का जहाज: मरुधरा की पहचान के प्रतीक ‘ऊंट’ की कलात्मक प्रतिमा झांकी की भव्यता को बढ़ाएगी।
- लोक नृत्य एवं संगीत: झांकी के साथ थिरकते कलाकार और गूंजते लोक स्वर राजस्थान की विविधता और सांस्कृतिक गौरव को जीवंत करेंगे।
- पारंपरिक कलाकृतियां: झांकी के हर कोने में राजस्थान की विशिष्ट स्थापत्य कला और पारंपरिक डिजाइनों का समावेश किया गया है।
सांस्कृतिक विरासत का गौरवपूर्ण परिचय
राजस्थान की यह झांकी न केवल प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह देश-दुनिया के समक्ष राजस्थान के ‘टूरिज्म’ और ‘हस्तशिल्प’ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक सशक्त माध्यम बनेगी। कर्तव्य पथ पर लाखों दर्शकों और टीवी के माध्यम से करोड़ों लोग राजस्थान की इस अद्वितीय शिल्प यात्रा के साक्षी बनेंगे।
