गंग नहर शताब्दी समारोह: भव्य आयोजनों का रोडमैप

नरेश गुनानी 

​मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि गंग नहर पश्चिमी राजस्थान की जीवन रेखा है। इसके 100 वर्ष पूर्ण होने का अवसर केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जल संरक्षण और किसान कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक होना चाहिए।

मुख्य कार्यक्रम और तिथियां

  • शुभारंभ: 26 अक्टूबर, 2026
  • अवधि: एक वर्ष तक (26 अक्टूबर, 2027 तक)
  • प्रमुख स्थल: शिवपुर हेड सहित सभी प्रमुख हेड रेगुलेटर्स पर नियमित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

किसान संवाद और तकनीकी आधुनिकता

​समारोह का मुख्य केंद्र बिंदु नहर क्षेत्र के किसान रहेंगे। इसके लिए निम्नलिखित विशेष गतिविधियां संचालित की जाएंगी:

  • मंडियों में संवाद: नहर क्षेत्र की 12 प्रमुख अनाज मंडियों में किसानों के साथ सीधे संवाद कार्यक्रम होंगे।
  • विशेषज्ञ मार्गदर्शन: किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों, ड्रिप सिस्टम (बूंद-बूंद सिंचाई) और जल संरक्षण के उन्नत तरीकों के बारे में विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • सम्मान समारोह: जल प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जल उपयोगकर्ता संगठनों के अध्यक्षों को सम्मानित किया जाएगा।

जनभागीदारी और जागरूकता गतिविधियां

​मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस अभियान को सरकारी आयोजनों तक सीमित न रखकर आमजन की भागीदारी सुनिश्चित की जाए:

  1. स्वच्छता अभियान: नहरों की साफ-सफाई के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
  2. रचनात्मक कार्यक्रम: जल संरक्षण का संदेश देने के लिए साइकिल रैली और नुक्कड़ नाटकों का आयोजन होगा।
  3. शैक्षिक गतिविधियां: स्कूली बच्चों और युवाओं को गंग नहर के इतिहास और जल की महत्ता से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं होंगी।

ऐतिहासिक महत्व: महाराजा गंगासिंह की विरासत

​गंग नहर का इतिहास राजस्थान के विकास की नींव से जुड़ा है:

    • नींव: 5 दिसंबर, 1925 को महाराजा गंगासिंह ने इसका निर्माण कार्य शुरू करवाया था।
    • प्रथम आगमन: 26 अक्टूबर, 1927 को शिवपुर हेड में पहली बार पानी पहुंचा था।
    • ​यही कारण है कि 26 अक्टूबर, 2026 से शताब्दी वर्ष का औपचारिक आगाज किया जा रहा है।

​”इस शताब्दी समारोह को हमें जल संरक्षण के व्यापक अभियान में बदलना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस जीवन रेखा के महत्व को समझ सकें।” — मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

 

​इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव (जल संसाधन विभाग) अभय कुमार एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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