खैरथल-तिजारा में पारंपरिक खेती को बढ़ावा — प्राचीन तकनीक और सीमित रसायनों से लागत घटाने का लक्ष्य
By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
अगस्त 11,2025
खैरथल-तिजारा। जिले में कृषि विभाग की एक महत्त्वपूर्ण पहल के तहत पारंपरिक खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस खेती में प्राचीन कृषि तकनीकों का उपयोग करते हुए और सीमित मात्रा में रसायनों का प्रयोग कर उत्पादन लागत को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल किसानों को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
किसानों को प्रशिक्षण और जागरूकता
इस योजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से पारंपरिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण में फसल चक्र, जैविक खाद का निर्माण, प्राकृतिक कीट नियंत्रण और जल-संरक्षण के उपाय शामिल हैं।
सीमित रसायन, अधिक लाभ
खेती में केवल आवश्यकतानुसार ही रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही, सरकार किसानों को जैविक खाद और जैविक कीटनाशक उपलब्ध कराएगी, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और उत्पादन लागत घटेगी।
30 क्लस्टर और 1500 हेक्टेयर में लक्ष्य
इस पहल के तहत 30 कृषि क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। योजना का लक्ष्य 1500 हेक्टेयर भूमि पर पारंपरिक खेती को लागू करना है। प्रत्येक क्लस्टर में किसानों को सामूहिक रूप से प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
उद्देश्यों पर फोकस
- लागत में कमी – रासायनिक इनपुट पर खर्च घटाना।
- आय में वृद्धि – टिकाऊ खेती से स्थिर और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन।
- पर्यावरण संरक्षण – मिट्टी, जल और जैव-विविधता की रक्षा।
- टिकाऊ कृषि मॉडल – भावी पीढ़ियों के लिए कृषि योग्य भूमि संरक्षित रखना।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाएगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन और मिट्टी की गिरती गुणवत्ता जैसी चुनौतियों से निपटने में भी कारगर साबित होगी।