नरेश गुनानी
खैरथल। राजस्थान की राजनीति में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो अपने पद से नहीं, बल्कि अपनी सादगी, ईमानदारी और जनता के प्रति अपने समर्पण से पहचाने जाते हैं। ऐसा ही एक बड़ा और सम्मानित नाम है—दीपचंद खैरिया। वर्तमान में खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़ बास विधानसभा क्षेत्र से विधायक दीपचंद खैरिया को उनके सादगीपूर्ण गांधीवादी जीवन दर्शन और साफ-सुथरी छवि के कारण पूरे क्षेत्र में ‘अलवर के गांधी’ के रूप में जाना जाता है।
आइए जानते हैं छात्र जीवन से लेकर 16वीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य बनने तक का उनका पूरा सफर:
प्रारंभिक जीवन और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
दीपचंद खैरिया का जन्म 15 जनवरी 1940 को अलवर जिले की किशनगढ़ बास तहसील के ग्राम जाटका में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री बदलू राम खेरिया और माता का नाम श्रीमती डोडी देवी है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया और साल 1967 में राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से बीए और एलएलबी (BA, LLB) की डिग्री हासिल की।
- विवाह: उनका विवाह 14 मई 1961 को श्रीमती शांति देवी (अब स्वर्गीय) के साथ हुआ था। उनके परिवार में वर्तमान में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं।
- पेशा: वकालत की डिग्री होने के कारण वे पेशे से वकील हैं और इसके साथ ही वे कृषि कार्य से भी जुड़े हुए हैं।
पंचायती राज से विधानसभा तक का सफर राजनीतिक यात्रा
खैरिया जी की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत उनके विद्यार्थी जीवन से ही हो गई थी, जब वे एक ‘सेवादल कार्यकर्ता’ के रूप में समाज सेवा में उतरे। उन्होंने जमीनी स्तर की राजनीति (पंचायती राज) से अपने करियर की शुरुआत की और आज विधानसभा के शीर्ष पटल पर हैं।
संगठनात्मक जिम्मेदारी और दल से जुड़ाव:
- युवक कांग्रेस: 1969-80 तक ब्लॉक किशनगढ़ बास में युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
- ब्लॉक व जिला स्तर: 1981-99 तक ब्लॉक अध्यक्ष (कांग्रेस, किशनगढ़ बास) और अलवर जिला कार्यकारिणी के सदस्य रहे। इसके बाद 1984-85 में जिला कांग्रेस कमेटी अलवर के सचिव और 2000-07 तक वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
- प्रदेश स्तर: 2008 से 2018 तक वे राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के सदस्य रहे।
पंचायती राज में मजबूत पकड़:
- 1969-80: सहकारी समिति माहोन्द (किशनगढ़ बास) के कोषाध्यक्ष रहे।
- 1981: ग्राम पंचायत माहोन्द के सरपंच चुने गए।
- 1981-95: लगातार लगभग 14 वर्षों तक किशनगढ़ बास के प्रधान रहे।
- 1982-85: जिला परिषद अलवर के उप जिला प्रमुख रहे।
- 1985-89: अलवर के जिला प्रमुख के रूप में कार्य किया।
संसदीय करियर और महत्वपूर्ण पद
जमीनी स्तर पर दशकों तक काम करने के बाद दीपचंद खैरिया ने राज्य की मुख्यधारा की विधायी राजनीति में कदम रखा।
- 15वीं विधानसभा (2018-23): वे पहली बार किशनगढ़ बास से विधायक चुने गए। इस दौरान उन्होंने विधानसभा की ‘याचिका समिति’ के सदस्य (2019-23) और राजस्थान किसान आयोग के उपाध्यक्ष (2022-23) के रूप में किसानों के हितों के लिए महत्वपूर्ण काम किए।
- 16वीं विधानसभा (2023-वर्तमान): 4 दिसंबर 2023 को वे पुनः किशनगढ़ बास से विधायक निर्वाचित हुए। वर्तमान में वे विधानसभा की ‘पुस्तकालय समिति’ (2024-25) और ‘पिछड़े वर्गों के कल्याण संबंधी समिति’ (2024-26) के सक्रिय सदस्य हैं।
विकास के कार्य और ‘अलवर के गांधी’ बनने की कहानी
दीपचंद खैरिया का नाम इतिहास में राजस्थान में वृद्धावस्था पेंशन योजना को शुरू करवाने के प्रयासों और इसके क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए याद किया जाता है। इसी जन-कल्याणकारी सोच और गांधीवादी मूल्यों के कारण उन्हें ‘अलवर का गांधी’ कहा गया।
15वीं विधानसभा के दौरान ऐतिहासिक कार्य:
विधायक के रूप में उनके पिछले 5 साल का कार्यकाल किशनगढ़ बास और नवगठित खैरथल-तिजारा जिले के लिए स्वर्णिम काल रहा। उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए निम्नलिखित बड़े काम करवाए:
- खैरथल-तिजारा को जिला बनवाना: क्षेत्र की जनता की दशकों पुरानी मांग को पूरा करते हुए उन्होंने खैरथल-तिजारा को नया जिला घोषित करवाया।
- प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण: क्षेत्र में 2 नई तहसीलें, नगर परिषद और नई नगर पालिकाओं का गठन करवाया।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: विशेष रूप से बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बालिका महाविद्यालय (Girls College), एग्रीकल्चर कॉलेज, कई नए स्कूल और क्षेत्र में बेहतर इलाज के लिए अनेक नए अस्पताल खुलवाए।