खेजड़ी सहित संरक्षित वृक्षों के संरक्षण के लिए नया अधिनियम तैयार, प्रारूप को दिया गया अंतिम रूप

नरेश गुनानी 

जयपुर । राजस्थान में खेजड़ी सहित अन्य महत्वपूर्ण और संरक्षित वृक्षों के संरक्षण को और अधिक मजबूत व प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रस्तावित ‘वृक्ष संरक्षण अधिनियम’ के प्रारूप पर गठित समिति की तीसरी बैठक मंगलवार को शासन सचिवालय स्थित मंत्रालय भवन में आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने की।

​बैठक के दौरान कानून के मसौदे को अंतिम रूप देने के साथ ही राज्य में पर्यावरण और वन संपदा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

विधेयक के प्रारूप को मिली मंजूरी, आगे की कार्रवाई के निर्देश

​बैठक में प्रस्तावित वृक्ष संरक्षण अधिनियम के प्रारूप के अलग-अलग प्रावधानों पर बिंदुवार और विस्तार से चर्चा की गई। समिति के सदस्यों और विशेषज्ञों से प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों तथा आवश्यक संशोधनों पर गहन विचार-विमर्श के बाद विधेयक के प्रारूप को अंतिम रूप दे दिया गया। विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने संबंधित विभागों को इस संबंध में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही जल्द से जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

​इस उच्च स्तरीय बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा, विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

गैर-कृषि और आबादी भूमि पर भी लागू होंगे नियम: क्या बदलेगा?

​वर्तमान व्यवस्था और नए प्रस्तावित अधिनियम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इस नए कानून के दायरे को काफी व्यापक बनाया गया है:

    • दायरे का विस्तार: वर्तमान में केवल कृषि भूमि पर स्थित वृक्षों को हटाने के लिए ही अनुमति लेने का प्रावधान लागू है। लेकिन नए अधिनियम के लागू होने के बाद गैर-कृषि भूमि, आबादी क्षेत्र, पंचायती भूमि और स्थानीय निकायों (नगर निगम/परिषद आदि) की भूमि पर स्थित संरक्षित वृक्षों को भी इसके दायरे में लाया जा रहा है।
    • अनुमति अनिवार्य: नई व्यवस्था के तहत बेहद अनिवार्य या आपातकालीन परिस्थितियों में ही सक्षम प्राधिकारी (Authorized Authority) की लिखित अनुमति के बाद ही इन वृक्षों को हटाया या काटा जा सकेगा।
    • संरक्षित वृक्षों की सूची: इस अधिनियम में विशेष रूप से संरक्षित वृक्षों की एक आधिकारिक सूची शामिल की जाएगी। इस सूची में शामिल किसी भी वृक्ष को बिना पूर्व अनुमति के काटना या नुकसान पहुंचाना पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय होगा।

कोट:

“राज्य सरकार वृक्षों और पर्यावरण के संरक्षण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। खेजड़ी जैसे सांस्कृतिक और पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण वृक्षों की रक्षा के लिए इस कानून को बेहद प्रभावी और सख्त बनाया जा रहा है।”

जोगाराम पटेल, संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री

 

​इस नए कानून के आने से राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी सहित अन्य दुर्लभ और उपयोगी पेड़ों की अवैध कटाई पर पूरी तरह से लगाम लग सकेगी।

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