खाद्य अध्ययन, विज्ञान और सस्टेनेबिलिटी पर पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में वैश्विक मंथन, 70 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत

खाद्य अध्ययन, विज्ञान और सस्टेनेबिलिटी पर पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में वैश्विक मंथन, 70 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत

जयपुर | 10 जनवरी, 2026

| योगेश शर्मा

​जयपुर स्थित पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में ‘इमर्जिंग फूड स्टडीज: इंटरसेक्शन ऑफ कल्चर, साइंस एंड सस्टेनेबिलिटी’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन ने भारत और विदेशों के प्रसिद्ध शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान किया, जहाँ वैश्विक खाद्य प्रणालियों के भविष्य पर गहन चर्चा की गई।

​संस्कृति और विज्ञान का संगम

​कॉन्फ्रेंस के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भोजन केवल पोषण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, विज्ञान और पर्यावरण के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। दो दिनों के सत्रों में शोधकर्ताओं द्वारा 70 से अधिक रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए, जिनमें आधुनिक खाद्य प्रणालियों की चुनौतियों और उनके स्थायी समाधानों पर प्रकाश डाला गया।

​वैश्विक विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

​उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के जॉइंट डायरेक्टर और विज्ञान भारती राजस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. शंकर बाबू थे। उन्होंने भारतीय संदर्भ में खाद्य सुरक्षा और स्थायी कृषि को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी नीतियों और अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया।

​प्रमुख वक्ताओं में शामिल थे:

  • प्रो. एनी सी. बेलोज और प्रो. सुधा राज (सिराक्यूज यूनिवर्सिटी, USA): इन्होंने वैश्विक दृष्टिकोण से पोषण और खाद्य प्रणालियों में सस्टेनेबिलिटी (सततता) के महत्व को समझाया।
  • डॉ. सुचारिता कांजिलाल (बार्ड कॉलेज, USA): प्लेनरी सेशन के माध्यम से इन्होंने खाद्य अध्ययन के समकालीन पहलुओं पर जानकारी साझा की।
  • प्रोफेसर एंड्रयू वार्न्स (लीड्स यूनिवर्सिटी): इनके सत्र के बाद समानांतर पेपर प्रेजेंटेशन आयोजित किए गए।

​पूर्णिमा यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता

​यूनिवर्सिटी की प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. चांदनी कृपलानी ने वैश्विक शैक्षणिक सहयोग की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि पूर्णिमा यूनिवर्सिटी सामाजिक रूप से जिम्मेदार शिक्षा और शोध-आधारित चर्चाओं के लिए प्रतिबद्ध है।

​कॉन्फ्रेंस की संयोजक डॉ. सुचारिता शर्मा ने आयोजन के इंटरडिसिप्लिनरी फोकस (अंतर्विषयक दृष्टिकोण) पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य, नीति और संस्कृति को समझने के लिए आज के दौर में ‘फूड स्टडीज’ अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।

​प्रमुख उपस्थितियाँ

​इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. देवेंद्र सोमवंशी, एफएसएच की डीन डॉ. प्रीति कौशिक और एसोसिएट डीन (रिसर्च) डॉ. उदित मामोडिया भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में सह-संयोजक डॉ. प्रियंका यादव ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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