खनिज क्षेत्र में ‘ईज ऑफ डूइंग’ के लिए प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी क्रांतिकारी कदम: प्रमुख सचिव रविकान्त
अहमदाबाद/जयपुर | 9 जनवरी, 2026
| सुनील शर्मा
अहमदाबाद में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर के दूसरे दिन राजस्थान ने खनन क्षेत्र में अपने नवाचारों और भविष्य की कार्ययोजना को देश के सामने रखा। सत्र के दौरान राजस्थान के प्रमुख सचिव (माइंस एवं भूविज्ञान) रविकान्त ने ‘आइडेंटिफिकेशन ऑफ प्री-एम्बेडेड ब्लॉक्स फॉर ऑक्शन’ विषय पर प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि राजस्थान खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने में देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
प्री-एम्बेडेड ब्लॉक: निवेश और रोजगार की नई राह
रविकान्त ने कहा कि केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप राजस्थान ने 8 मेजर मिनरल प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही माइनर मिनरल के 62 और मेजर मिनरल के 5 नए ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं।
- फायदा: इन ब्लॉकों की नीलामी से पहले ही आवश्यक वैधानिक अनुमतियां प्राप्त कर ली जाती हैं, जिससे सफल बोलीदाता बिना किसी देरी के खनन कार्य शुरू कर सकता है।
- परिणाम: खानों के जल्द परिचालन से निवेश बढ़ेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा और सरकारी राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
चुनौतियों पर मंथन: अनुमतियों में समय कम करना जरूरी
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि नीलाम की गई खानों को धरातल पर शुरू करने में देरी एक राष्ट्रीय समस्या है। उन्होंने कुछ प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित किया:
- विभागीय समन्वय: वन एवं वन्यजीव विभाग, आईबीएम (IBM), सेक और सीया के बीच बेहतर समन्वय की कमी से अनुमतियों में अनावश्यक समय लगता है।
- प्रक्रियात्मक देरी: जनसुनवाई के नोटिस से लेकर मिनट्स जारी होने तक दो माह लग जाते हैं। माइनिंग प्लान की स्वीकृति और रिजर्व प्राइस तय करने की प्रक्रिया को भी गति देने की आवश्यकता है।
- समाधान: उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया ताकि खनन शुरू करने के लिए आवश्यक लगभग 20 अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके।
बंशीपहाड़पुर का सफल मॉडल
रविकान्त ने राजस्थान के बंशीपहाड़पुर में प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की सफल नीलामी का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी और तैयार हो, तो निवेशक अधिक रुचि दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि “खानों को जल्द परिचालन में लाना समय की मांग है और राजस्थान इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।”
राजस्थान के प्रतिनिधिमंडल की सहभागिता
इस महत्वपूर्ण शिविर में राजस्थान का प्रतिनिधित्व प्रमुख सचिव रविकान्त के साथ अतिरिक्त निदेशक (भूविज्ञान) आलोक प्रकाश जैन, भूवैज्ञानिक सीपी दाधीच और सुशील कुमार हुड्डा कर रहे हैं। शिविर में देश के सभी राज्यों के प्रतिनिधि खनन क्षेत्र की ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।