खनिज उत्पादन और रॉयल्टी ट्रेंड का होगा नियमित विश्लेषण
माइनिंग सेक्टर में गति लाने की नई पहल, हर माह 4–5 खानों के उत्पादन पर रखी जाएगी नजर
| नरेश गुनानी
04 दिसंबर 2025, जयपुर।
राजस्थान के खनन क्षेत्र को और अधिक संगठित, पारदर्शी तथा विकासोन्मुख बनाने की दिशा में माइंस विभाग ने एक नई पहल शुरू की है। अब प्रदेश में खनिज उत्पादन और रॉयल्टी वसूली के ट्रेंड का नियमित विश्लेषण किया जाएगा। इसके माध्यम से उत्पादन में कमी-बेशी, बाजार मांग, संभावनाएं और राजस्व में हो रहे उतार-चढ़ाव की सटीक जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे भविष्य की नीतिगत निर्णय प्रक्रिया को गति मिल सकेगी।
प्रमुख सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम टी. रविकान्त ने विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान निर्देश जारी करते हुए कहा कि वृत स्तर पर अधीक्षण खनि अभियंता प्रतिमाह चार से पांच प्रमुख खानों के उत्पादन ट्रेंड का विश्लेषण करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित क्षेत्र का ड्रोन सर्वे भी कराया जा सकेगा, ताकि वास्तविक उत्पादन, स्टॉक और क्षमता का पारदर्शी सत्यापन सुनिश्चित हो।
रॉयल्टी वसूली की भी होगी वैज्ञानिक मॉनिटरिंग
बैठक में यह भी तय किया गया कि आरसीसी–ईआरसीसी के माध्यम से की जा रही रॉयल्टी वसूली के आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। रॉयल्टी में कमी या वृद्धि के कारणों, उत्पादन की तुलना, स्टॉक की उपलब्धता और वैध खनन की स्थिति का तुलनात्मक विश्लेषण किया जाएगा। इससे न केवल राजस्व क्षति रोकी जा सकेगी, बल्कि उत्पादन से संबंधित आर्थिक संकेतकों को समझना भी आसान होगा।
टी. रविकान्त ने कहा—
“नियमित विश्लेषण से खानों में होने वाले उतार-चढ़ाव की सटीक जानकारी मिलेगी। यदि किसी विशिष्ट माह में उत्पादन में कमी आती है या रॉयल्टी घटती है, तो उसके पीछे व्यावहारिक कारणों की पहचान आवश्यक है।”
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया न केवल रिसर्च-आधारित होगी बल्कि माइनिंग सेक्टर को अधिक गतिशील, संगठित और व्यापार-अनुकूल बनाने में सहायक होगी।
मुख्यमंत्री की माइनिंग विज़न को मिलेगा बल
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान को माइनिंग सेक्टर में अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। इसी दृष्टि से राज्य सरकार अन्वेषण, तकनीकी नवाचार, मूल्य संवर्धन, एवं मॉनिटरिंग प्रणाली पर विशेष ध्यान दे रही है। नवीन संशोधनों एवं नीतिगत फैसलों के परिणामस्वरूप खनन क्षेत्र में बहुआयामी विस्तार देखने को मिल रहा है।
अवैध खनन पर भी होगी प्रभावी रोक
नई प्रणाली से अधिकारियों की फील्ड सतर्कता बढ़ेगी और वैध खनन को बढ़ावा मिलेगा। उत्पादन व क्षेत्रीय गतिविधियों का ट्रैक रिकॉर्ड डिजिटल इंटीग्रेशन से जोड़ा जाएगा, जिससे
- वैध रॉयल्टी संग्रह सुनिश्चित होगा
- अवैध खनन की पहचान तेजी से होगी
- खानधारकों को वास्तविक मांग-आपूर्ति का संकेत मिलेगा
निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा ने बताया कि फील्ड स्तर पर निगरानी तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है। अलग-अलग वृत क्षेत्रों में निगरानी रजिस्टर, उत्पादन-रिपोर्टिंग सिस्टम और डिजिटल मानिटरिंग को मजबूत किया जाएगा।
बैठक में विभागीय अधिकारी शामिल
बैठक में संयुक्त सचिव अरविन्द सारश्वत, अतिरिक्त निदेशक महेश माथुर, योगेन्द्र सिंह सहवाल, वित्तीय सलाहकार सुरेश जैन, ओएसडी श्रीकृष्ण शर्मा, एसजी सुनील वर्मा सहित एसएमई-स्तर और एमई-एएमई स्तर के फील्ड अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। सभी अधिकारियों को निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार नियमित विश्लेषण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पहल खनन क्षेत्र में प्रशासनिक पारदर्शिता, वैज्ञानिक प्रबंधन और उत्पादन-राजस्व संतुलन के नए आयाम स्थापित करेगी। इससे न केवल खानधारक लाभान्वित होंगे, बल्कि राज्य के खनिज राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।