| नरेश गुनानी
जयपुर | 25 दिसंबर, 2025
राजस्थान स्टेट माइंस एवं मिनरल्स (RSMM) ने प्रदेश के खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और खनिजों के अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। अब लिग्नाइट, रॉक फास्फेट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के परिवहन में लगे सभी वाहनों में जीपीएस (GPS) सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
1 जनवरी, 2026 से लागू होंगे नए नियम
RSMM प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि नागौर, बाड़मेर और उदयपुर स्थित खानों से खनिज परिवहन करने वाले सभी वाहन स्वामियों को 31 दिसंबर, 2025 तक अपने वाहनों में विभाग द्वारा स्वीकृत AIS-140 जीपीएस युक्त उपकरण स्थापित करवाने होंगे। यह व्यवस्था 1 जनवरी, 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगी। निर्धारित समय सीमा के बाद बिना जीपीएस वाले वाहनों को खनिज परिवहन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इन जिलों की खदानों पर रहेगा विशेष फोकस
यह आदेश मुख्य रूप से उन क्षेत्रों के लिए जारी किए गए हैं जहाँ से बड़ी मात्रा में बहुमूल्य खनिजों का उठाव होता है:
- उदयपुर: यहाँ से होने वाले रॉक फास्फेट के परिवहन की निगरानी की जाएगी।
- बाड़मेर और नागौर: यहाँ लिग्नाइट परिवहन में लगे सैकड़ों ट्रकों और डंपरों को ट्रैक किया जाएगा।
तकनीक से रुकेगी कर चोरी और अवैध खनन
इस नई व्यवस्था के लागू होने से खनिज परिवहन की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी। इसके पीछे विभाग के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- पारदर्शिता: खान से गंतव्य स्थान तक माल पहुँचने की सटीक जानकारी मिलेगी।
- अवैध गतिविधियों पर रोक: खनिज के रास्ते में चोरी होने या निर्धारित मार्ग से भटकने की स्थिति में तुरंत अलर्ट मिलेगा।
- सुरक्षा: AIS-140 मानक के जीपीएस में पैनिक बटन जैसी सुविधाएं होती हैं, जो आपातकालीन स्थिति में वाहन चालक की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
वाहन स्वामियों को निर्देश
RSMM ने वाहन स्वामियों और ट्रांसपोर्टर्स को हिदायत दी है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द स्वीकृत मानक वाले उपकरणों को स्थापित करवा लें। विभाग ने यह भी साफ किया है कि जीपीएस उपकरणों की गुणवत्ता और उनकी सक्रियता की समय-समय पर जांच की जाएगी ताकि सिस्टम की सुचारू कार्यप्रणाली बनी रहे।

