गौरव कोचर
वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में मंगलवार सुबह उस समय अचानक हलचल बढ़ गई, जब एशियाई बाजारों के खुलते ही ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) तेल की कीमतों में करीब 2% का तगड़ा उछाल दर्ज किया गया। पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में जो गिरावट देखी जा रही थी, वह मंगलवार सुबह अचानक आए एक घटनाक्रम के बाद थम गई और बाजार का पूरा रुख बदल गया।
क्यों बदला बाजार का रुख? (प्रमुख कारण)
- नए सैन्य हमलों से भड़की घबराहट: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी रहने के बावजूद, अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में नए रक्षात्मक हवाई हमले किए हैं। इस कार्रवाई में मिसाइल लॉन्च साइट्स और माइंस (सुरंगें) बिछाने की कोशिश कर रहे जहाजों को निशाना बनाया गया है। इस सैन्य कार्रवाई ने निवेशकों को फिर से चिंता में डाल दिया है।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर सस्पेंस: वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस रूट को खोलने के लिए हालांकि बातचीत चल रही है और इसे 30 दिनों के भीतर बहाल करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर जंग पूरी तरह खत्म होने का कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है।
- सप्लाई चैन का संकट: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की होलिया रिपोर्टों के अनुसार, फरवरी से अब तक वैश्विक तेल आपूर्ति में बड़ी गिरावट आई है। बाजार में इन्वेंट्री लगातार कम हो रही है, जिससे कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
बाजार पर क्या हुआ असर?
मंगलवार सुबह शुरुआती कारोबार में वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर $97.32 से $98 प्रति बैरल के दायरे में पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी तेजी का रुख देखा गया।
बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक दोनों पक्षों के बीच स्थायी युद्धविराम और समुद्री मार्गों को पूरी तरह सुरक्षित खोलने पर अंतिम मुहर नहीं लग जाती, तब तक कच्चे तेल के बाजार में यह उतार-चढ़ाव और घबराहट (Geopolitical Volatility) बनी रहेगी।
भारत पर क्या होगा इसका असर?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली किसी भी बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर आयात लागत का दबाव बढ़ने से आने वाले दिनों में देश के विभिन्न राज्यों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई महंगी होने से आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है।