गौरव कोचर
वर्तमान में दुनिया कई मोर्चों पर एक साथ सुलग रही है, जो इसे “विश्व युद्ध” जैसी स्थिति के करीब ले जा रही है:
- ईरान और मध्य पूर्व: फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय युद्ध का खतरा चरम पर है।
- यूक्रेन और रूस: दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह युद्ध थमा नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन अब पहले से कहीं अधिक आक्रामक हैं और नाटो (NATO) के साथ सीधे टकराव का खतरा अभी भी बना हुआ है।
- नया परमाणु युग (Third Nuclear Era): ‘न्यू स्टार्ट’ (New START) संधि के समाप्त होने के साथ ही परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के वैश्विक ढांचे चरमरा गए हैं। अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों की तैनाती की खबरों ने इस खतरे को और भी वास्तविक बना दिया है।
- एशिया-प्रशांत: चीन और ताइवान के बीच तनाव 2026 में “हाई-रिस्क” श्रेणी में पहुंच गया है। दक्षिण चीन सागर में बढ़ती सैन्य मौजूदगी किसी भी समय एक बड़ी चिंगारी बन सकती है।
क्या खतरे को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है?
जहाँ एक तरफ युद्ध की आहट है, वहीं दूसरी तरफ कई जानकार इसे “हाइब्रिड वॉरफेयर” या “नया ठंडा युद्ध” (New Cold War) मान रहे हैं। इसके कुछ तर्क इस प्रकार हैं:
- आर्थिक निर्भरता: आज की दुनिया आर्थिक रूप से इतनी जुड़ी हुई है कि एक पूर्ण पैमाने का विश्व युद्ध सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को तबाह कर देगा। चीन और अमेरिका जैसे बड़े देश इस “आपसी विनाश” से बचना चाहते हैं।
- हाइब्रिड युद्ध का जोर: आधुनिक युद्ध अब केवल टैंकों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि साइबर हमलों, सबसी केबल (Subsea cables) को काटने और पावर ग्रिड ठप्प करने जैसे तरीकों से लड़े जा रहे हैं। इसे “युद्ध के नीचे की जंग” कहा जा रहा है, जो सीधे टकराव को टालती है।
- कूटनीतिक प्रयास: परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए अप्रैल-मई 2026 में होने वाली ‘NPT समीक्षा सम्मेलन’ से दुनिया को काफी उम्मीदें हैं।
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जोखिम
तीव्रता
संभावित प्रभाव
ईरान-इजरायल युद्ध
बहुत अधिक
वैश्विक तेल संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता
हाइब्रिड हमले
उच्च
यूरोपीय इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर खतरा
परमाणु प्रसार
उच्च
हथियारों की नई होड़ और गलती से परमाणु युद्ध का डर
अमेरिका का अलगाववाद
मध्यम
सुरक्षा
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हम निश्चित रूप से 1945 के बाद के सबसे खतरनाक दौर में जी रहे हैं। ‘डूम्सडे क्लॉक’ (Doomsday Clock) आधी रात के बेहद करीब है। हालांकि, इसे “तीसरा विश्व युद्ध” कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि अभी भी बड़ी शक्तियां सीधे टकराव के बजाय परोक्ष युद्ध (Proxy War) और आर्थिक दबाव को प्राथमिकता दे रही हैं। यदि कूटनीति विफल होती है, तो यह ‘बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया खतरा’ हकीकत में बदलने में देर नहीं लगेगी।
