“हिंदी संवाद के साथ हमारी पहचान और संस्कृति की वाहक है” — सुधीर कुमार बत्रा
प्रीति बालानी
कोटा, राजस्थान, 20 अगस्त, 2026: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), क्षेत्रीय कार्यालय, कोटा और भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के केंद्रीय संचार ब्यूरो, क्षेत्रीय कार्यालय, कोटा ने संयुक्त रूप से राजभाषा हिंदी के महत्व और डिजिटल युग में इसकी संभावनाओं पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला EPFO के सभागार में आयोजित की गई।
कार्यशाला में दोनों कार्यालयों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रशासनिक कार्यों में सरल, सहज और प्रभावी हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संकल्प लिया।
मुख्य वक्ता और क्षेत्रीय आयुक्त द्वितीय सुधीर कुमार बत्रा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी भारत की विविधता, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता को जोड़ने वाली एक सशक्त भाषा है। उन्होंने प्रशासन में व्यवहारिक हिंदी के प्रयोग को सुशासन, पारदर्शिता और जनसंपर्क को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक बताया। बत्रा ने जोर दिया कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारी सामूहिक चेतना की वाहक भी है।
सहायक आयुक्त अनुराधा सिंह ने राजभाषा हिंदी को शासन और नागरिकों के बीच संवाद का एक सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से पत्राचार, नोटिंग और दैनिक कार्यालयीन कार्यों में हिंदी को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
सहायक निदेशक रामेश्वर लाल मीणा ने हिंदी की ऐतिहासिक यात्रा, संविधान में इसके राजभाषा स्वरूप और डिजिटल युग में इसकी बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में हिंदी ज्ञान और तकनीक की एक सशक्त भाषा बनकर उभर रही है।
इस अवसर पर EPFO के हिंदी अनुवादक आशुतोष मित्तल ने राजभाषा अधिनियम 1976 के प्रस्तावों, नियमों और संशोधनों के बारे में एक विस्तृत प्रस्तुति दी। कार्यशाला का संचालन लेखा अधिकारी विजय तांतिया और शाखा पर्यवेक्षक लीला शंकर ने किया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग और भारत की सभी भाषाओं के सम्मान और संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया।