“पारंपरिक पंचायत व्यवस्था भारत का मूल वैकल्पिक विवाद समाधान मॉडल”: जस्टिस सूर्यकांत | “मध्यस्थता केवल विकल्प नहीं, आवश्यकता”: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
जयपुर/ प्रीति बालानी
राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित होटल ‘द ललित’ में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ‘कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ’ सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA), कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन (CLA), सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और ‘निवारण’ (मेडिएटर्स ऑफ सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने किया।
समारोह की शुरुआत वंदे मातरम् और नालसा (NALSA) थीम सॉन्ग की प्रस्तुति के साथ हुई, जिसने न्याय, संवाद और शांतिपूर्ण विवाद निस्तारण के प्रति सामूहिक संकल्प का संदेश दिया।
सद्भाव और संतुलन का प्रतीक है मध्यस्थता: जस्टिस सूर्यकांत
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने जयपुर शहर के संतुलन और सौहार्द की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जयपुर का कोई एक भाग दूसरे पर हावी नहीं होता, ठीक उसी प्रकार मध्यस्थता प्रक्रिया में भी किसी एक पक्ष का वर्चस्व नहीं होना चाहिए।
जस्टिस सूर्यकांत ने भारत की पारंपरिक पंचायत व्यवस्था को देश का मूल ‘वैलकल्पित विवाद समाधान’ (ADR) मॉडल करार दिया। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल, वाणिज्यिक और इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी विवादों में मध्यस्थता की भूमिका लगातार बढ़ रही है। साथ ही, उन्होंने जोर दिया कि ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इसे सदैव प्रशिक्षित मध्यस्थों द्वारा ही संचालित किया जाना चाहिए।
हार-जीत से परे समाधान की राह: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सम्मेलन को न्याय व्यवस्था में एक नए वैश्विक दृष्टिकोण की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा:
“अदालती न्याय में एक पक्ष जीतता है और दूसरा हारता है, जबकि संवाद और मध्यस्थता हार-जीत से आगे बढ़कर समाधान की बात करते हैं। इससे पक्षों के बीच वर्षों पुरानी कटुता और मानसिक टकराव समाप्त होता है। वर्तमान समय में मध्यस्थता केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है।”
मुख्यमंत्री ने राजस्थान में ग्राम न्याय पंचायतों, विधिक सहायता और पीड़ित प्रतिकर के जरिए हजारों मुकदमों के सफल निस्तारण की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया।
वैश्विक स्थिरता और आर्थिक प्रगति का आधार स्तंभ
- केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि शांति, मध्यस्थता और विधि का शासन अब केवल कानूनी अवधारणाएं नहीं हैं, बल्कि ये वैश्विक स्थिरता और सतत विकास के आधार स्तंभ हैं।
- महान्यायवादी (Attorney General) आर. वेंकटरमणी ने निष्पक्षता और परस्पर विश्वास को प्रभावी मध्यस्थता की आत्मा बताया।
- सॉलिसिटर General तुषार मेहता ने कहा कि भारतीय विधिक परंपरा में टकराव से पहले संवाद और सुलह को सदैव प्राथमिकता दी गई है।
- जाम्बिया सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति आभा नायर पटेल ने कहा, “सुलह के बिना कानून अधूरा है और विधि के शासन के बिना सुलह कमजोर है।”
‘जयपुर घोषणा-पत्र’ पर हस्ताक्षर और ऐतिहासिक विमोचन
सम्मेलन के दौरान ‘जयपुर घोषणा-पत्र’ (Jaipur Declaration) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए गए, जो मध्यस्थता को वैश्विक स्तर पर सुलभ और सर्वस्वीकार्य विवाद समाधान तंत्र के रूप में मजबूत करने का संकल्प प्रस्तुत करता है।
इसके अलावा, राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति द्वारका प्रसाद गुप्ता की जन्मशती के अवसर पर उनके न्यायिक योगदान को समर्पित स्मृति ग्रंथ का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता सहित भारत एवं राष्ट्रमंडल देशों के अनेक गणमान्य न्यायाधीश, अधिवक्ता व नीति-निर्माता उपस्थित रहे।