प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के भरोसे बिना पुख्ता दस्तावेजों के भारत से यात्रा शुरू न करने की सलाह
- काठमांडू में फंसे श्रद्धालुओं की मदद के लिए विदेश मंत्रालय और दूतावास सक्रिय; सांसद सुप्रिया सुले ने उठाया था मामला
- 20 जून से सरकारी मार्ग (नाथूला दर्रा) के जरिए शुरू हो चुकी है वर्ष 2026 की आधिकारिक यात्रा
गौरव कोचर
निजी टूर ऑपरेटरों (Private Tour Operators) के माध्यम से नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने देश के नागरिकों से अपील की है कि वे जब तक चीन का वैध वीजा और आवश्यक एंट्री परमिट प्राप्त न कर लें, तब तक भारत से अपनी यात्रा शुरू न करें।
यह परामर्श शनिवार रात को उस समय जारी किया गया, जब काठमांडू (नेपाल) में करीब 52 भारतीय नागरिकों के फंसे होने और उनसे सहायता के अनुरोध मिलने की खबरें सामने आईं।
केवल ‘उम्मीद’ के भरोसे न निकलें घर से बाहर
विदेश मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में साफ तौर पर कहा है कि केवल इस उम्मीद में यात्रा शुरू कर देना कि जरूरी दस्तावेज रास्ते में या बाद में मिल जाएंगे, बेहद जोखिम भरा है। मंत्रालय के अनुसार:
”नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे भारत से तब तक अपनी यात्रा शुरू न करें, जब तक कि पूरी यात्रा के लिए आवश्यक सभी यात्रा दस्तावेज प्राप्त न हो जाएं। बिना पुष्टि वाले दस्तावेजों के या बाद में परमिट मिलने की उम्मीद में यात्रा शुरू करने से रास्ते में फंसने की आशंका काफी बढ़ जाती है।”
सांसद सुप्रिया सुले ने उठाया मामला, विदेश मंत्री से की अपील
नेपाल में फंसे 52 भारतीय श्रद्धालुओं का यह मामला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर उठाया था। उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा और भोजन-पानी को लेकर चिंता जताते हुए लिखा:
”कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए लगभग 52 भारतीय नागरिक इस समय नेपाल के काठमांडू में फंसे हुए हैं। उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है।”
सांसद ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और बीजिंग (चीन) स्थित भारतीय दूतावास से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने और फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित आगे भेजने या आवश्यक सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया है। इसके बाद भारतीय प्रशासन और दूतावास राहत कार्यों में जुट गए हैं।
प्राइवेट टूर ऑपरेटरों की साख की जांच करना अनिवार्य
विदेश मंत्रालय ने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया है कि फंसे हुए ज्यादातर तीर्थयात्री निजी टूर ऑपरेटरों के जरिए यात्रा कर रहे थे। मंत्रालय ने श्रद्धालुओं को चेतावनी दी है कि वे किसी भी ऑपरेटर के साथ बुकिंग करने से पहले कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें:
- पंजीकरण की जांच: बुकिंग करने से पहले यह अच्छी तरह जांच लें कि संबंधित टूर ऑपरेटर पूरी तरह से पंजीकृत (Registered) और प्राधिकृत (Authorised) है या नहीं।
- दस्तावेजों का सत्यापन: ऑपरेटरों के केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा न करें, बल्कि वीजा और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) में प्रवेश के लिए आवश्यक चीनी परमिट की वास्तविक स्थिति की स्वयं जांच करें।
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 और मुख्य मार्ग
हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए मुख्य रूप से तीन रास्ते उपयोग में लाए जाते हैं:
- नाथूला दर्रा मार्ग (सिक्किम): सरकार द्वारा आयोजित आधिकारिक यात्रा 2026 का पहला जत्था 20 जून को ही इस रास्ते से चीन (तिब्बत) में प्रवेश कर चुका है।
- लिपुलेख दर्रा मार्ग (उत्तराखंड): यह सरकार द्वारा संचालित दूसरा पारंपरिक मार्ग है।
- नेपाल मार्ग: कई श्रद्धालु और निजी एजेंसियां नेपाल के रास्ते काठमांडू होते हुए तिब्बत सीमा में प्रवेश का विकल्प चुनती हैं, जिसके लिए चीनी दूतावास से विशेष वीजा और परमिट की आवश्यकता होती है।
विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि ऐसे खतरनाक और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा के दौरान नियमों की अनदेखी भारी असुविधा और सुरक्षा के लिए संकट पैदा कर सकती है, इसलिए पूर्ण तैयारी के बाद ही कदम बढ़ाएं।