कैमरे के फ्लैश ने जगाया अस्पताल प्रशासन: घंटे भर गेट पर तड़पते रहे घायल, मीडिया को देख दौड़ पड़े जिम्मेदार
| हरि प्रसाद शर्मा
पुष्कर (अजमेर)। तीर्थ नगरी पुष्कर के राजकीय उपजिला अस्पताल की संवेदनहीनता और लचर कार्यप्रणाली एक बार फिर सुर्खियों में है। मंगलवार को अस्पताल के मुख्य द्वार पर मानवता शर्मसार होती नजर आई, जब सड़क हादसे में घायल दो युवक करीब एक घंटे तक इलाज और एम्बुलेंस के अभाव में जमीन पर तड़पते रहे। सिस्टम की यह ‘गहरी नींद’ तब टूटी जब मौके पर मीडिया के कैमरे पहुंचे।
एम्बुलेंस के इंतजार में बीता ‘गोल्डन ऑवर’
जानकारी के अनुसार, सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल दो युवकों को प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत अजमेर रेफर किया जाना था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घायलों की हालत नाजुक थी और वे दर्द से कराह रहे थे, लेकिन अस्पताल की सरकारी एम्बुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ के सामने बार-बार मिन्नतें कीं, गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
अस्पताल की इस बदहाली से हताश होकर आखिरकार परिजनों ने निजी एम्बुलेंस की व्यवस्था की और खुद ही घायलों को लेकर अजमेर के लिए रवाना हुए।
कैमरे की लाइट पड़ते ही हरकत में आया सिस्टम
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे ‘नाटकीय’ पहलू तब शुरू हुआ जब घटनास्थल पर मीडियाकर्मी पहुंचे। जैसे ही कैमरों की लाइट ऑन हुई और कवरेज शुरू हुई, अस्पताल का सुस्त प्रशासन अचानक ‘सुपर एक्टिव’ मोड में आ गया।
उपजिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. जी. आर. पूरी आनन-फानन में मौके पर पहुंचे। जो प्रशासन एक घंटे से नदारद था, वह कैमरों के सामने खुद मरीजों को उठाकर अंदर ले जाने की कवायद में जुट गया। अस्पताल के इस बदले हुए व्यवहार को देख वहां मौजूद स्थानीय लोग भी दंग रह गए।
जनता के तीखे सवाल: क्या कैमरों के भरोसे चलेगा इलाज?
इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा कि क्या सरकारी अस्पतालों में इलाज पाने के लिए अब मीडिया का सहारा लेना अनिवार्य हो गया है?
- सवाल 1: अगर मौके पर मीडिया नहीं पहुंचती, तो क्या प्रशासन इसी तरह मूकदर्शक बना रहता?
- सवाल 2: गंभीर घायलों के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था समय पर क्यों नहीं सुनिश्चित की गई?
- सवाल 3: क्या पीएमओ और स्टाफ की जिम्मेदारी केवल कैमरे के सामने ही जागती है?
पुष्कर जैसे अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्थल पर, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं, वहां के मुख्य अस्पताल की ऐसी ‘कैमरा-प्रेरित’ सक्रियता स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।
