बिहार के सीमांचल और पूर्वी क्षेत्र के लिए जीवनरेखा बनेगा खगड़िया-पूर्णिया चार लेन राजमार्ग; 3,936.05 करोड़ रुपये की परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी
नई दिल्ली/ रंजीत मेहरा/बिहार के उपजाऊ मैदानों में कृषि क्रांति और तटीय व मैदानी संपर्क को एक नया आयाम देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग-31 (NH-31) और राष्ट्रीय राजमार्ग-231 (NH-231) के खगड़िया-पूर्णिया खंड को चार लेन के मानक में अपग्रेड करने के प्रस्ताव को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने मंजूरी दे दी है। 3,936.05 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली यह परियोजना परिवहन के माध्यम से बिहार के कृषि प्रधान क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करेगी।
खगड़िया के खेतों से निकलने वाले केले के गुच्छे हों या पूर्णिया के तालाबों और प्रसंस्करण केंद्रों से चलने वाली मखाने की बोरियां—अब तक यातायात जाम और मौसमी रुकावटों के कारण इनकी बाजार तक पहुंच धीमी रही है। केले जैसी जल्दी खराब होने वाली फसल के लिए, जहां हर एक घंटा महत्वपूर्ण होता है, यह राजमार्ग नुकसान को कम करने, गुणवत्ता बनाए रखने और किसानों को उनकी उपज का उच्चतम मूल्य दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।
बाढ़-रोधी बुनियादी ढांचे का निर्माण
पूर्वी बिहार का परिवहन तंत्र ऐतिहासिक रूप से कोसी और गंगा नदी प्रणालियों के कारण आने वाली बाढ़ के प्रति संवेदनशील रहा है। मौसमी बाढ़ के चलते सड़क संपर्क टूटने से न केवल माल ढुलाई रुकती थी, बल्कि स्थानीय आवाजाही भी ठप हो जाती थी।
- आधुनिक इंजीनियरिंग उपाय: इस परियोजना में ऐसे इंजीनियरिंग डिजाइन शामिल किए गए हैं जो बाढ़ की विभीषिका को झेलने में सक्षम होंगे।
- मजबूत संरचना: सड़क की ज्यामिति (Geometry) में सुधार, फुटपाथ संरचनाओं को सुदृढ़ करने और आधुनिक जल निकासी (Drainage) प्रणालियों को एकीकृत करके इसे पूरे वर्ष चालू रहने योग्य बनाया जाएगा।
यात्रा समय में 50% की भारी कटौती: सीमांचल को अवसरों से जोड़ना
सीमांचल क्षेत्र (खगड़िया, पूर्णिया, कटिहार और आसपास के जिले) लंबे समय से सीमित कनेक्टिविटी के कारण विकास की चुनौतियों से जूझ रहा था। प्रशासनिक, शैक्षिक और आर्थिक केंद्रों तक पहुंचना एक कठिन कार्य था। इस उन्नत कॉरिडोर के चालू होने से:
समय की बचत: वर्तमान में जिन यात्राओं में लगभग 3.5 से 4 घंटे का समय लगता है, वे इस कॉरिडोर के बनने के बाद महज 1.5 से 2 घंटे में पूरी हो सकेंगी।
यह समय की बचत न केवल आपातकालीन चिकित्सा और शिक्षा के लिए वरदान साबित होगी, बल्कि दैनिक यात्रियों के लिए क्षेत्रीय आवागमन को बेहद सुगम बना देगी।
अंतरराज्यीय संपर्कों को सुदृढ़ करना और यातायात की अराजकता से मुक्ति
बिहार के आंतरिक विकास के अलावा, खगड़िया-पूर्णिया गलियारे का पूर्वी भारत के व्यापार में रणनीतिक महत्व है। यह राजमार्ग बिहार और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करेगा, साथ ही व्यापक राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के माध्यम से झारखंड तक पहुंच को आसान बनाएगा।
इसके साथ ही, यह परियोजना खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया जिलों के घनी आबादी वाले शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अपर्याप्त ज्यामितीय संरचनाओं, तीखे मोड़ों और लंबे समय से चले आ रहे ट्रैफिक जाम की समस्या को पूरी तरह समाप्त कर देगी। यह दो-लेन कॉरिडोर जब चार लेन में अपग्रेड होगा, तो पटना से लेकर पश्चिम बंगाल और झारखंड तक निर्बाध गाड़ियां दौड़ सकेंगी।
पीएम गति शक्ति के तहत आर्थिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों का एकीकरण
यह परियोजना देश के महत्वाकांक्षी पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के सिद्धांतों पर आधारित है, जो विभिन्न परिवहन माध्यमों को आपस में जोड़ती है।
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आर्थिक एवं लॉजिस्टिक्स केंद्र |
संख्या |
प्रमुख जुड़ाव |
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पीएम गति शक्ति आर्थिक केंद्र |
05 |
1 कपड़ा क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, और 2 मत्स्य एवं समुद्री भोजन पार्क। |
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लॉजिस्टिक्स हब जुड़ाव |
11 |
4 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 1 हवाई अड्डा, 4 राष्ट्रीय राजमार्ग और 2 राज्य राजमार्ग। |
यह बहुआयामी एकीकरण (Multimodal Integration) न केवल बड़े उद्योगों और प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देगा, बल्कि छोटे व्यापारियों और किसानों को भी मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़कर पूरे पूर्वी भारत के विकास को नई गति प्रदान करेगा।