जयपुर/प्रीति बालानी/सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से केयर इकोनॉमी (Care Economy) विषय पर बुधवार को निदेशालय सभागार में एक दिवसीय राज्य स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दिनेश कुमार ने की।
वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों की देखभाल सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक को संबोधित करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव दिनेश कुमार ने केयर इकोनॉमी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों, दिव्यांगजनों और अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और सुलभ देखभाल सेवाओं का विस्तार करना राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी संबंधित सरकारी विभागों, गैर-सरकारी संगठनों और हितधारकों के बीच प्रभावी तालमेल और अभिसरण (Convergence) की आवश्यकता पर बल दिया।
राष्ट्रीय स्तर की नीतियों के लिए राज्य स्तर से जाएगा प्रस्ताव
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव ललित कुमार ने बैठक के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परामर्श बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में केयर इकोनॉमी तंत्र को समावेशी और मजबूत बनाने के लिए सभी पक्षों से ठोस सुझाव और अनुशंसाएं संकलित करना है। बैठक से प्राप्त सभी महत्वपूर्ण सुझावों को केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को भेजा जाएगा, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर नीतियां तय करते समय राजस्थान के अनुभवों और मॉडलों को शामिल किया जा सके।
जमीनी चुनौतियों, नवाचारों और वित्तीय संसाधनों पर विमर्श
परामर्श सत्र के दौरान केयर सेक्टर के सुदृढ़ीकरण से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई:
- चुनौतियां और समाधान: मैदानी स्तर पर देखभाल सेवाओं के संचालन में आने वाली व्यवहारिक समस्याओं और उनके त्वरित समाधान पर विचार किया गया।
- बेस्ट प्रैक्टिसेज का प्रसार: राज्य में सफलतापूर्वक संचालित मॉडलों और नवाचारों की समीक्षा की गई, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की व्यापक संभावनाएं हैं।
- संस्थागत व वित्तीय ढांचा: केयर सेक्टर में संस्थागत व्यवस्था, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, देखभाल कर्मियों का कौशल विकास (Skill Development) और पारदर्शी सेवा वितरण प्रणाली पर विशेषज्ञों ने राय रखी।
- निगरानी तंत्र: सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक मजबूत और प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर सहमति बनी।
बैठक में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), विकास सहयोगी संस्थाओं और केयर सेक्टर से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने सुझाव प्रस्तुत किए।