केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत स्टॉक सीमा तय की, व्यापारियों में रोष
Edited By: लोकेंद्र सिंह शेखावत
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 28, 2025
जयपुर, 28 मई 2025
केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग करते हुए खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत प्रमुख खाद्य पदार्थ—विशेष रूप से गेहूं—पर स्टॉक सीमा निर्धारित की गई है। यह आदेश दिनांक 27 मई 2025 को उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी किया गया, जिसके तहत व्यापारियों, प्रोसेसरों और रिटेलर्स के लिये नई स्टॉक सीमाएं तय की गई हैं।
क्या हैं आदेश के मुख्य बिंदु?
सरकार के अनुसार यह आदेश जनहित में आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी और कालाबाजारी को रोकने के उद्देश्य से जारी किया गया है। इसके तहत:
- व्यापारी और थोक विक्रेता: 3000 मीट्रिक टन
- रिटेल आउटलेट (हर एक): 10 मीट्रिक टन
- बिग चेन रिटेलर (हर एक आउटलेट): 10 मीट्रिक टन
- और ऐसे आउटलेट की कुल संख्या 10 से अधिक नहीं हो सकती।
- प्रोसेसर (आटा मिल): मासिक स्थापित क्षमता के 70% के गुणनफल के अनुसार स्टॉक सीमा तय की गई है।
साथ ही, संबंधित विधिक इकाइयों को अनिवार्य रूप से खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल https://evegoils.nic.in/wsp/login (जिसे शीघ्र ही https://foodstock.dfpd.gov.in पर स्थानांतरित किया जाएगा) पर नियमित रूप से स्टॉक की स्थिति की घोषणा करनी होगी। यदि किसी इकाई के पास निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक है, तो उसे अधिसूचना की तिथि से 15 दिन के भीतर स्टॉक को निर्धारित सीमा में लाना अनिवार्य होगा।

व्यापारी वर्ग में गहरा असंतोष
इस आदेश के विरोध में राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमैन बाबूलाल गुप्ता ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा:
“देश में गेहूं की इस वर्ष रिकॉर्ड पैदावार हुई है। पिछले वर्ष उत्पादन 1133 लाख टन था, जो इस बार बढ़कर लगभग 1154 लाख टन तक पहुंच गया है। इसके साथ ही पुराने स्टॉक (कैरीओवर स्टॉक) भी उपलब्ध हैं। बाजारों में गेहूं थोक में 25 से 28 रुपये प्रति किलो तक आसानी से उपलब्ध है, और मण्डियों में आवक भी बनी हुई है।”
उन्होंने सरकार पर एफ.सी.आई. की विफलता का ठीकरा व्यापारियों पर फोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा:
“एफ.सी.आई. द्वारा खरीदा गया गेहूं मण्डियों में पड़ा हुआ है, और उसे उठाया नहीं जा रहा। ऐसे में बाजार में स्टॉक सीमाएं लागू करना व्यापार की स्वतंत्रता पर कुठाराघात है।”
गुप्ता ने यह भी मांग रखी कि खुदरा विक्रेताओं के लिए 10 टन की सीमा अव्यवहारिक है और इसे बढ़ाकर कम-से-कम 100 टन किया जाना चाहिए, ताकि रिटेल बिजनेस बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से चल सके।
क्या कहती है सरकार?
सरकार का तर्क है कि स्टॉक सीमा तय करने का उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी पर नियंत्रण रखना और उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। मंत्रालय के अनुसार यदि बाजार स्थिर रहता है और कालाबाजारी पर नियंत्रण बना रहता है, तो भविष्य में इसमें छूट देने पर पुनर्विचार किया जा सकता है।