केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने थपथपाई राजस्थान की पीठ: टीबी मुक्त अभियान और दवा वितरण में प्रदेश बना मिसाल

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने थपथपाई राजस्थान की पीठ: टीबी मुक्त अभियान और दवा वितरण में प्रदेश बना मिसाल

| गौरव कोचर

नई दिल्ली/जयपुर, 02 जनवरी 2026 केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जमकर सराहना की है। शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में नड्डा ने ‘टीबी मुक्त राजस्थान’ अभियान, नि:शुल्क दवा योजना और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर की गई भर्तियों को देश के लिए एक बेहतरीन उदाहरण बताया।

प्रमुख उपलब्धियां: टीबी स्क्रीनिंग में राजस्थान देश में अग्रणी

​बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने प्रदेश की प्रगति का ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि:

  • 97% स्क्रीनिंग: संवेदनशील आबादी की टीबी स्क्रीनिंग करने वाला राजस्थान देश का अग्रणी राज्य बन गया है।
  • निक्षय मित्र: 84 प्रतिशत लाभार्थियों को ‘निक्षय मित्र’ के माध्यम से पोषण सहायता दी जा रही है।
  • नि:शुल्क दवाएं: वित्तीय वर्ष 2025-26 (नवंबर तक) में लगभग 14 करोड़ रोगी नि:शुल्क दवा योजना से लाभान्वित हुए हैं।
  • हब एंड स्पोक मॉडल: जांच सेवाओं के विस्तार के लिए प्रदेश में केंद्र के हब एंड स्पोक मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया गया है।

केंद्रीय मंत्री के अहम निर्देश: 100 दिवसीय विशेष अभियान

​जे.पी. नड्डा ने स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए:

  1. टीबी मुक्त अभियान: छूटे हुए क्षेत्रों में स्क्रीनिंग के लिए फरवरी 2026 से 100 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
  2. जन औषधि केंद्र: सभी जिला अस्पतालों में ‘प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र’ और मेडिकल कॉलेजों में ‘अमृत फार्मेसी’ अनिवार्य रूप से स्थापित की जाएं।
  3. मिलावट पर लगाम: खाद्य सुरक्षा के तहत ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ जैसे अभियानों को और सख्त करने तथा नकली दवाओं के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के निर्देश दिए गए।
  4. ब्लड बैंक: ब्लड बैंकों का संचालन पूरी तरह नियमों के अनुरूप हो, इसकी सख्त निगरानी की जाए।

मानव संसाधन और औषधि नियंत्रण में अव्वल

​प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि राजस्थान ने औषधि नियंत्रण के क्षेत्र में मिसाल पेश की है।

  • फंड का शत-प्रतिशत उपयोग: एसएसडीआरएस (SSDRS) योजना के तहत राजस्थान ने 99.96 प्रतिशत फंड का उपयोग किया है।
  • औषधि नियंत्रण: राज्य में सब-स्टैंडर्ड और नकली दवाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ड्रग कंट्रोल विंग को और अधिक सशक्त बनाया गया है।

केंद्र से सहयोग और लंबित मुद्दों पर चर्चा

​बैठक में राजस्थान सरकार ने केंद्र से कुछ प्रमुख विषयों पर सहयोग मांगा:

  • एनएचएम कर्मचारी: नियमितीकरण के बाद कर्मचारियों के लिए निरंतर वित्तीय सहयोग का आग्रह।
  • बीमा मामले: कोविड-19 के दौरान शहीद हुए स्वास्थ्य कर्मियों के लंबित बीमा दावों का शीघ्र निस्तारण।
  • पीएम-एबीएचआईएम: संसाधनों के पुनर्विनियोग (Re-appropriation) प्रस्तावों पर स्वीकृति।

​केंद्रीय मंत्री ने इन सभी लंबित विषयों के शीघ्र समाधान के लिए आश्वस्त किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजस्थान ‘आयुष्मान भारत’ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

बैठक में उपस्थिति: बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव, एफएसएसएआई सीईओ रजित पुन्हानी, मिशन निदेशक (NHM) अमित यादव, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल और निदेशक जनस्वास्थ्य रवि प्रकाश शर्मा सहित केंद्र व राज्य के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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