केंद्रीय गृहमंत्री की मौजूदगी में हुआ ऐतिहासिक समझौता: राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच नर्मदा अवार्ड का विवाद सुलझा

सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत से जुड़े वर्षों पुराने वित्तीय विवादों का हुआ ‘वन-टाइम सेटलमेंट’

नई दिल्ली/जयपुर, 07 जुलाई/ गौरव कोचर /देश में सहकारी संघवाद (को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म) की भावना को मजबूत करते हुए अंतराज्जीय जल विवादों को सुलझाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की गरिमामयी मौजूदगी में मंगलवार को नई दिल्ली में राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच नर्मदा अवार्ड के लंबित भुगतान के निपटारे पर एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

​इस महत्वपूर्ण अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तीनों पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मिलकर समझौते पत्र पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत में राज्यों की हिस्सेदारी से जुड़े लंबे समय से लंबित वित्तीय विवादों के अंतिम निपटारे (वन-टाइम सेटलमेंट) का मार्ग प्रशस्त करता है।

​सहकारी संवाद से सुलझा दशकों पुराना मामला

​चारों राज्यों (मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान) द्वारा आपसी सहभागिता और सकारात्मक संवाद की भावना दिखाने से वर्षों से लंबित नर्मदा नदी से जुड़े वित्तीय मुद्दों का स्थायी समाधान संभव हो पाया है। इस समझौते के बाद अब बिना किसी विवाद के नर्मदा नदी के जल का और अधिक बेहतर और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

​उल्लेखनीय है कि नर्मदा जल विवाद प्राधिकरण द्वारा वर्ष 1979 में अवार्ड के माध्यम से चारों राज्यों के बीच जल का आवंटन किया गया था। इस अवार्ड के क्लॉज IV/5 के प्रावधान के अनुसार, कोई भी राज्य मानसून काल के दौरान उपलब्ध अधिशेष (सरप्लस) जल का उपयोग अपने राज्य में कर सकता है और यह अधिशेष जल उस राज्य के मुख्य जल कोटे के खाते में नहीं जोड़ा जाएगा।

​पश्चिमी राजस्थान के अभावग्रस्त क्षेत्रों को मिलेगा पीने का पानी

​इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ राजस्थान के शुष्क और पानी की कमी वाले क्षेत्रों को मिलने जा रहा है। मानसून के दौरान मिलने वाले इसी अधिशेष जल के भंडारण और सदुपयोग के लिए राज्य सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है।

  • बजट घोषणा के तहत काम: मानसून काल के अतिरिक्त पानी को सहेजने के लिए वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा के क्रम में एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करवाई जा रही है।
  • पेयजल की समस्या होगी दूर: इस डीपीआर के धरातल पर उतरने से पश्चिमी राजस्थान के जल संकट से जूझ रहे वंचित और अभावग्रस्त क्षेत्रों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

​जल प्रबंधन में राजस्थान की लगातार बड़ी सफलताएं

​मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय बनाकर जल क्षेत्र में लगातार ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर रही है।

  1. ईआरसीपी/एमपीकेसी परियोजना: हाल ही में मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार के साथ मिलकर पार्वती-कालीसिंध-चम्बल नदियों के जल के बेहतर उपयोग के लिए एमपीकेसी (ERCP) परियोजना को धरातल पर उतारा गया।
  2. हथिणीकुंड बैराज समझौता: हरियाणा के साथ मिलकर हथिणीकुंड बैराज से राजस्थान के शेखावाटी अंचल (सीकर, झुंझुनू, चुरू) में यमुना जल के उपयोग को लेकर ऐतिहासिक समझौता किया गया।

​इन लगातार हो रहे समझौतों से राजस्थान के अभावग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ-साथ राज्य की सामाजिक और आर्थिक उन्नति का एक नया रास्ता खुला है।

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