जयपुर / योगेश शर्मा /भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (बीयूवीएम) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने 9 अगस्त को आयोजित होने वाले बीयूवीएम के स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए उन्हें औपचारिक निमंत्रण पत्र सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बीयूवीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने किया। इस प्रतिनिधिमंडल में मध्यप्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय सलाहकार राजेश जैन, वरिष्ठ महामंत्री मुकुंद मिश्रा, हेमंत गुप्ता, महामंत्री राकेश यादव, अतुल गुप्ता, संगठन मंत्री सुनील पांडे और संत मिश्रा सहित देशभर के प्रमुख व्यापारी नेता शामिल रहे।
कृषि व्यवस्था को पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने हेतु ज्ञापन
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने देश में तिलहन और दलहन की पैदावार बढ़ाने, वैज्ञानिक भंडारण, विपणन, मूल्य संवर्धन तथा किसानों की आय में वृद्धि से जुड़े विभिन्न विषयों पर आधारित एक विस्तृत प्रतिवेदन केंद्रीय मंत्री को सौंपा। राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यदि इन सुझावों को लागू किया जाए तो देश की कृषि व्यवस्था अधिक पारदर्शी, आधुनिक और किसान हितैषी बन सकती है।
तिलहन-दलहन का उत्पादन बढ़ाने और आयात घटाने पर जोर
प्रतिवेदन में इस बात पर चिंता जताई गई कि भारत वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग 145 लाख टन तेल और 40 लाख टन दालों का आयात करता है। देश में तिलहन एवं दलहन का उत्पादन दोगुना करने के लिए सरकार को निम्नलिखित ठोस कदम उठाने का सुझाव दिया गया:
- बारानी (असिंचित) भूमि को समतल बनाना।
- स्थानीय मिट्टी व पानी की गुणवत्ता के अनुसार उन्नत बीजों का अनुसंधान एवं विकास करना।
- कृषि कार्यों में प्रयुक्त होने वाले आधुनिक उपकरणों और मशीनों पर सब्सिडी की मात्रा बढ़ाना।
मंडी व्यवस्था का आधुनिकीकरण: ‘समाप्त नहीं, सशक्त बनाएं’
व्यापार मंडल ने स्पष्ट किया कि कृषि मंडियों को बंद करने के बजाय उन्हें अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए। इसके लिए सुझाव दिए गए कि:
- मंडियों में वैज्ञानिक भंडारण, ग्रेडिंग-क्लीनिंग मशीनें, आधुनिक गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाएं, पैकेजिंग यूनिट्स, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और बेहतर परिवहन सुविधाएं विकसित की जाएं।
- कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए मंडियों को सीधे रेलवे ट्रैक से जोड़ा जाए।
ज्ञापन की मुख्य बिंदुवार मांगें:
- ‘एक देश – एक मंडी सेस’ की नीति लागू हो: ‘एक देश-एक कर’ (GST) की तर्ज पर पूरे देश में खाद्यान्न, तिलहन, गुड़, दलहन और मसालों पर अधिकतम 0.50 प्रतिशत (आधा प्रतिशत) मंडी सेस तय किया जाए। इसके अतिरिक्त कृषक कल्याण फीस, यूजर चार्ज या अन्य किसी भी प्रकार का सरचार्ज पूरी तरह समाप्त किया जाए।
- MSP पर खरीद आढ़तियों के माध्यम से हो: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर होने वाली सरकारी खरीद की पूरी प्रक्रिया कृषि मंडियों के पंजीकृत आढ़तियों के माध्यम से ही संचालित की जाए, और राज्य व केंद्र सरकार की एजेंसियां किसानों व व्यापारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करें।
- नाफेड व एनसीसीएफ की नीतियां बाजार-आधारित हों: सरकारी एजेंसियों जैसे NAFED और NCCF की खरीद-बिक्री नीति वास्तविक बाजार परिस्थितियों के अनुकूल होनी चाहिए। पुराने स्टॉक का समयबद्ध निस्तारण किया जाए और MSP से कम दरों पर बिक्री से बचा जाए ताकि बाजार असंतुलित न हो।
- कृषि मंडियों को ‘ड्राई पोर्ट’ का दर्जा मिले: निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख कृषि मंडियों को रेलवे ट्रैक से जोड़कर उन्हें ड्राई पोर्ट घोषित किया जाए।
- किसान प्रशिक्षण और दीर्घकालिक सुधार: किसानों को आवश्यकतानुसार यूरिया, उर्वरक और कीटनाशकों (पॉलीहाउस/पेस्टिसाइड्स) के संतुलित उपयोग के लिए प्रशिक्षित करने हेतु विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जाए।