श्योपुर | गनपत चौहान
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने रविवार (21 जून, 2026) को मध्य प्रदेश के सुप्रसिद्ध कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने उद्यान के ‘चीता प्रबंधन क्षेत्र’ (Cheetah Management Area) का विशेष रूप से अवलोकन किया और भारत के इस महत्वाकांक्षी वन्यजीव पुनरुद्धार कार्यक्रम की जमीनी प्रगति का जायजा लिया।
दौरे के दौरान वन मंडलाधिकारी (DFO) ने राष्ट्रपति को ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत अब तक की प्रगति, चीतों की सेहत, उनकी सुरक्षा और पार्क में किए गए विशेष प्रबंधन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
बोत्सवाना से आए चीतों की स्थिति की समीक्षा
गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुर्मु नवंबर 2025 में बोत्सवाना की राजकीय यात्रा पर गई थीं। उस यात्रा के दौरान वह बोत्सवाना सरकार द्वारा भारत को आठ चीतों के प्रतीकात्मक हस्तांतरण (Symbolic Transfer) की ऐतिहासिक साक्षी बनी थीं। इसके बाद, इन सभी आठ चीतों को फरवरी 2026 में सुरक्षित रूप से कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाया गया था। राष्ट्रपति ने आज के दौरे में इन नए मेहमानों के अनुकूलन (Acclimatization) और उनके रख-रखाव की भी विशेष समीक्षा की।
जैव-विविधता की बहाली का वैश्विक प्रतीक: प्रोजेक्ट चीता
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्वावधान और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के नेतृत्व में 17 सितंबर, 2022 को ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत की गई थी। भारत में दशकों पहले विलुप्त हो चुके चीतों की आबादी को फिर से बसाने और वैश्विक जैव-विविधता को समृद्ध करने की दिशा में यह परियोजना देश की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कूनो ही क्यों बना पहली पसंद?
विशेषज्ञों के अनुसार, कूनो राष्ट्रीय उद्यान को भारत के पहले चीता पुनर्प्रवेश स्थल (Cheetah Reintroduction Site) के रूप में चुने जाने के पीछे कई अहम कारण हैं:
- आदर्श आवास: चीतों के दौड़ने और रहने के लिए अनुकूल घास के मैदान।
- पर्याप्त शिकार: पार्क में चीतों के भोजन के लिए चीतल, सांभर और अन्य वन्यजीवों की प्रचुरता।
- न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप: यह क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित और मानवीय गतिविधियों से मुक्त है।
तीन चरणों में कूनो आए चीते
कूनो नेशनल पार्क अब तक तीन अलग-अलग देशों से आए चीतों का आशियाना बन चुका है:
|
चरण |
समय |
देश |
|---|---|---|
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प्रथम दल |
सितंबर 2022 |
नामीबिया (Namibia) |
|
द्वितीय दल |
फरवरी 2023 |
दक्षिण अफ्रीका (South Africa) |
|
तृतीय दल |
फरवरी 2026 |
बोत्सवाना |
राष्ट्रपति का यह दौरा कूनो में काम कर रहे मैदानी अधिकारियों, वन्यजीव विशेषज्ञों और वन रक्षकों का हौसला बढ़ाने वाला साबित होगा, जो दिन-रात इस वैश्विक परियोजना को सफल बनाने में जुटे हैं।