कुडेकेला सहकारी समिति में कमीशनखोरी का खेल: बिचौलियों की चांदी, किसानों का खून-पसीना पानी

कुडेकेला सहकारी समिति में कमीशनखोरी का खेल: बिचौलियों की चांदी, किसानों का खून-पसीना पानी

| रिपोर्ट गणपत चौहान छत्तीसगढ़

छाल। क्षेत्र की कुडेकेला सहकारी समिति इन दिनों भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का केंद्र बन गई है। सहायक प्रबंधक, नोडल अधिकारी और बिचौलियों की कथित मिलीभगत से यहाँ सरकारी नियमों को ताक पर रखकर धान खरीदी का काला खेल धड़ल्ले से जारी है। जहाँ एक ओर आम किसानों को नमी और गुणवत्ता के नाम पर परेशान किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बिचौलियों के धान की बिना किसी जांच के सीधे खरीदी की जा रही है।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: ‘सुविधा शुल्क’ बिना काम नहीं

​किसानों का आरोप है कि समिति में धान बेचने के लिए रिश्वत देना अनिवार्य हो गया है। यदि धान की गुणवत्ता अच्छी है, तो उसे पास करने के लिए ‘सुविधा शुल्क’ मांगा जाता है और यदि धान में कोई कमी है, तो उसे खपाने के लिए भारी कमीशन की मांग की जाती है।

  • नियमों की अनदेखी: बिचौलियों द्वारा लाए गए पुराने जूट बोरों के धान को बिना “पाला डाले” (सफाई और जांच) सीधे ट्रकों में लोड कर दिया जाता है।
  • अवैध तौल: शासन के निर्धारित 40.700 किलोग्राम के स्थान पर किसानों से 41.200 किलोग्राम धान तौला जा रहा है, जिससे सीधे तौर पर किसानों को आर्थिक चपत लग रही है।
  • लेबर समस्या: समिति में लेबर की कमी का बहाना बनाकर किसानों को स्वयं के लेबर लाने पर मजबूर किया जाता है, फिर भी तौल का भुगतान उन्हीं से वसूला जाता है।

पीड़ित किसानों की आपबीती: कलेक्टर तक पहुंची शिकायतें

​भ्रष्टाचार के इस मकड़जाल में फंसे कई किसानों ने अपनी व्यथा सुनाई है:

  1. वीरेंद्र राठिया (बहेरामार): वीरेंद्र ने बताया कि वे 404 बोरी धान लेकर पहुंचे थे, जहाँ उनसे 50 हजार रुपये की मांग की गई। मना करने पर विवाद हुआ। तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद केवल 90 कट्टे खरीदे गए और 235 कट्टे जब्त कर लिए गए। हैरानी की बात यह है कि शेष 79 कट्टे धान का आज तक कोई सुराग नहीं मिला है। उन्होंने अब कलेक्टर जनदर्शन में न्याय की गुहार लगाई है।
  2. गंजईपाली की महिला कृषक: 500 बोरी धान लेकर पहुंची महिला किसान से भी मोटी रकम मांगी गई। पैसा न देने पर धान रिजेक्ट कर दिया गया। मंत्रालय और कलेक्टर तक मामला पहुँचने के बाद ही उनकी धान खरीदी प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।
  3. तरेकेला के किसान के साथ अन्याय: 12 जनवरी को एक किसान का 108 कट्टा धान इसलिए लौटा दिया गया क्योंकि उसने रिश्वत नहीं दी, जबकि उसी समय बिचौलियों का ट्रैक्टर सीधे ट्रक में अनलोड हो रहा था।

सीसीटीवी और निगरानी पर सवाल

​समिति में पारदर्शिता के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी संदेह के घेरे में हैं। बताया जा रहा है कि कैमरा केवल गेट पर लगा है, जिससे अंदर हो रही अवैध गतिविधियों की रिकॉर्डिंग नहीं हो पाती। किसानों का कहना है कि सहायक प्रबंधक के खिलाफ कई बार शिकायतें होने के बावजूद अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं।

किसानों की मुख्य मांगें

  • ​पुराने जूट बोरों में भरे धान की उच्च स्तरीय जांच की जाए।
  • ​सहायक प्रबंधक और दोषी अधिकारियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई हो।
  • ​ओडिशा की तर्ज पर गर्मी फसल के धान की खरीदी का भी स्पष्ट नियम बनाया जाए ताकि बिचौलियों का गोरखधंधा बंद हो सके।

​ जहाँ एक ओर शासन किसानों के हित की बात करता है, वहीं कुडेकेला जैसी समितियों में व्याप्त यह भ्रष्टाचार सरकारी दावों की पोल खोल रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन रसूखदार अधिकारियों और बिचौलियों के गठजोड़ पर कब और क्या कार्रवाई करता है।

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