नए सफारी मार्ग और रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
| नरेश गुनानी
जयपुर, 10 मार्च 2026। राजस्थान के राजसमंद, पाली और ब्यावर जिलों के वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खबर है। वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने मंगलवार को विधानसभा में स्पष्ट किया कि बहुप्रतीक्षित कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व परियोजना का कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है। सरकार का मानना है कि टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद क्षेत्र में न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।
परियोजना की अब तक की प्रगति
वन राज्य मंत्री ने सदन को परियोजना के क्रमवार विकास की जानकारी दी:
- अगस्त 2023: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिली।
- जुलाई 2024: कोर और बफर क्षेत्र के निर्धारण के लिए 11 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन।
- जून 2025: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य वन्यजीव मण्डल की बैठक में एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा।
- फरवरी 2026: केंद्र सरकार और NTCA द्वारा उठाए गए आक्षेपों का समाधान कर प्रतिउत्तर दोबारा प्रेषित किया गया।
वर्तमान में, NTCA की सिफारिश के अनुसार रिजर्व की चौड़ाई बढ़ाने के लिए भूमि चिह्नित कर ली गई है और इसके हस्तांतरण के लिए राजस्व विभाग को पत्र लिखा गया है।
पर्यटन को बढ़ावा: नए सफारी मार्ग प्रस्तावित
कुंभलगढ़ और टॉडगढ़-रावली अभयारण्य में वन्यजीव पर्यटन को विस्तार देने के लिए सरकार ने नए मार्ग खोलने की योजना बनाई है:
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अभयारण्य |
प्रस्तावित नए सफारी मार्ग |
वर्तमान में संचालित मार्ग |
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कुंभलगढ़ |
कालीघाट से भीलभेरी, फुलास से गोरम घाट |
बीड़ की भागल से आरेट का फाटक, रणकपुर से मुछाला महावीर |
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टॉडगढ़-रावली |
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प्लेनी |
मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि यदि क्षेत्रीय विधायक पैंथर सफारी के लिए कोई नया मार्ग सुझाते हैं, तो विभाग परीक्षण के उपरांत वहां सफारी गेट खोलने पर विचार करेगा।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर लगाम
वन राज्य मंत्री ने सदन के पटल पर पिछले दो वर्षों में प्रदेश के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष और पीड़ितों को दिए गए मुआवजे का विवरण भी रखा। उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व बनने से वन्यजीवों का संरक्षण बेहतर होगा और सुरक्षा तंत्र मजबूत होने से संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था
संजय शर्मा ने जोर देकर कहा कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय समुदाय को होगा। टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र की ब्रांडिंग होगी, जिससे होटल, गाइड, वाहन सफारी और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े लोगों की आय में भारी वृद्धि होने का अनुमान है।
