टेलीग्राफ टाइम्स रिपोर्ट | चीतल रेस्क्यू ऑपरेशन
कुंडल क्षेत्र में श्वानों के हमले से घायल हुआ चीतल, 2 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सरिस्का में सुरक्षित छोड़ा गया
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 11,2025
दौसा, राजस्थान।
दौसा जिले के कुंडल क्षेत्र में वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग की सतर्कता से एक चीतल की जान बचाई गई। सरिस्का वन क्षेत्र से भटककर आबादी क्षेत्र में पहुंचे एक चीतल पर आवारा श्वानों ने हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना बैरवा ढाणी क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां परिजनों की मदद और वन विभाग की तत्परता ने इस चीतल को नया जीवन दिया।
हमले के बाद मचा हड़कंप, स्थानीयों ने की सूचना
घटना के समय ग्रामीणों ने चीतल को झाड़ियों के बीच कराहते देखा और तत्काल इसकी सूचना वन विभाग और नजदीकी वन्यजीव संरक्षण समूह को दी। चीतल के शरीर पर गहरे घाव थे, खासकर बाएं पैर पर, जिससे लगातार खून बह रहा था। बताया जा रहा है कि आवारा कुत्तों का एक झुंड चीतल पर झपट पड़ा था।
2 घंटे तक चला रेस्क्यू अभियान
वनकर्मी रामप्रसाद मीना और दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल चीतल को सुरक्षित निकालने के लिए करीब दो घंटे तक प्रयास किया। संसाधनों की कमी के बावजूद टीम ने हिम्मत नहीं हारी और घायल चीतल को कुशलता से पकड़कर पास के पशु चिकित्सालय पहुंचाया।
प्राथमिक उपचार के बाद सरिस्का में छोड़ा गया
पशु चिकित्सक डॉ. रमेश ने चीतल का उपचार किया और बताया कि उसके बाएं पैर पर कई गहरे घाव थे, जिनमें कई टांके लगाने पड़े। उपचार के बाद वन विभाग की टीम ने उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार चीतल को सरिस्का वन क्षेत्र में पांडूपोल भर्तृहरि के पास उसकी प्रजाति के अन्य चीतलों के बीच छोड़ दिया।
वन विभाग की कार्रवाई की सराहना
स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों और ग्रामीणों ने वन विभाग के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर वन विभाग न पहुंचता, तो चीतल की जान बचा पाना मुश्किल होता।
भविष्य में घटनाओं को रोकने की तैयारी
वन्यजीव प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग से और अधिक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, विभाग की ओर से बताया गया है कि वे इस पूरी घटना की जांच कर रहे हैं और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

